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दूसरा दिन, छोटी टीमों का बड़ा धमाका… टी-20 विश्वकप में बदला क्रिकेट का मिज़ाज

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टी-20 विश्वकप के शुरुआती दो दिन और सिर्फ़ पाँच मुकाबले… लेकिन इन मैचों ने क्रिकेट की तस्वीर साफ कर दी है। यह टूर्नामेंट अब केवल बड़ी टीमों की बादशाहत का मंच नहीं रहा।

ICC द्वारा नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, यूएसए, नेपाल और अफगानिस्तान जैसी उभरती टीमों को मौका देना, क्रिकेट के भविष्य की दिशा तय करता दिख रहा है।
इन टीमों ने यह साबित कर दिया है कि वे सिर्फ़ भाग लेने नहीं, बल्कि पूरी ताक़त से टक्कर देने के इरादे से मैदान में उतरी हैं।

पाकिस्तान बनाम नीदरलैंड-
पहले ही मुकाबले में नीदरलैंड ने बड़ा संदेश दे दिया। पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम को जीत के लिए आख़िरी ओवर तक संघर्ष करना पड़ा। यह साफ हो गया कि अब छोटी टीमों के खिलाफ ‘वॉकओवर’ की सोच काम नहीं आने वाली।

वेस्टइंडीज बनाम स्कॉटलैंड-
182 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए स्कॉटलैंड ने आख़िरी सांस तक लड़ाई लड़ी। नतीजा भले उनके पक्ष में न गया हो, लेकिन यह मैच बताता है कि अगर स्कॉटलैंड को नियमित रूप से बड़े मुकाबले मिलें, तो वे किसी भी टीम को मुश्किल में डाल सकते हैं।

भारत बनाम यूएसए-
डिफेंडिंग चैंपियन भारत के सामने भारतीय मूल खिलाड़ियों से सजी यूएसए टीम ने ग़ज़ब का जज़्बा दिखाया। भारत 161 रन ही बना सका, जिनमें आधे से ज़्यादा रन कप्तान सूर्यकुमार यादव के बल्ले से आए।
एक समय 13 ओवर में भारत 77/6 पर संघर्ष कर रहा था, बड़े नाम पवेलियन लौट चुके थे, लेकिन यूएसए ने कहीं भी मैच को आसान नहीं होने दिया। अंततः भारत को सिर्फ़ 29 रन से जीत मिली।

न्यूज़ीलैंड बनाम अफगानिस्तान-
अफगानिस्तान अब सिर्फ़ ‘अपसेट टीम’ नहीं रहा। वे अब हर बड़े टूर्नामेंट में नियमित चुनौती देने वाली टीम बन चुके हैं। उनका आत्मविश्वास और खेल दोनों लगातार निखर रहे हैं।

इंग्लैंड बनाम नेपाल-
नेपाल ने दिल जीत लिया। इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीम को आख़िरी गेंद तक पसीना आ गया। नेपाल बार-बार साबित कर रहा है कि वह सिर्फ़ अनुभव लेने नहीं, बल्कि इतिहास रचने आया है।

हाल के वर्षों में वेस्टइंडीज को हराना और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आख़िरी गेंद तक मुकाबला खींचना कोई संयोग नहीं, बल्कि मेहनत, तैयारी और विकास का नतीजा है। अब भी इटली और ओमान जैसी टीमों का खेल देखना बाकी है, लेकिन शुरुआती मुकाबले एक बात तय कर चुके हैं क्रिकेट अब सिर्फ़ बड़ी टीमों का खेल नहीं रहा।

अब ज़रूरत है कि ICC इन उभरती टीमों को और मौके दे। ज़्यादा मैच = ज़्यादा अनुभव = ज़्यादा प्रतिस्पर्धा क्योंकि… खेलेंगे तभी तो बढ़ेंगे।

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