धर्म-अध्यात्म

भगवान चतुराई से नहीं सरलता से मिलते हैं- पं. शिवम बापू

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सिरोल्या (अमर चौधरी)। प्रभु श्रीराम ने जो किया वो करें और श्रीकृष्ण ने जो कहा उसे अवश्य करें। श्रीराम ने मर्यादा की शिक्षा दी है तो श्रीकृष्ण ने कर्म भक्ति का पाठ पढ़ाया है। श्रीकृष्ण की लीला सुनने और सुनाने से ईश्वर भक्ति की आसक्ति होती है। एक बार कोई प्रभु के चरणों को पकड़ ले तो उसके चरण कभी भी किसी भी परिस्थिति में डगमगाते नहीं है।

ये बात टिगरिया गोगा के पास ग्राम निवान्या में आयोजित नानी बाई रो मायरो कथा में व्यासपीठ से पं. शिवम बापू ने की। उन्होंने कहा, कि कर्म से बने भाग्य से हमें जाति, स्थान, भोग और आयु की प्राप्ति होती है। सब कुछ कर्म पर ही आधारित है, फिर भी कर्म में जो लिखा है उस भाग्य की अमंगला तो केवल ईश्वर ही बदल सकता है। बापू ने कहा कि नानी बाई को उसकी सास और ननद ने बहुत परेशान किया और बोला कि तेरे परिवार से कोई नहीं आया मायरा भरने। इस पर नानी बाई परेशान होकर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करती है और अपनी सास से बोलती है। मेरे ठाकुरजी मेरा मायरा भरने आएंगे।

नानी बाई भगवान से बोलती है कि भगवान आप ही मेरे सब कुछ हो अब आप ही मेरी लाज रखना। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं और रुक्मिणी मायरा भरने आएंगे। इस पर नानी बाई ने अपनी सास से बोला कि आप अपनी मांग बताओ कितना मायरा चाहिए। इधर दूसरे दिन भगवान नानी बाई का मायरा लेकर पहुंचे। यह देख नानी बाई की सास चौंक गई। भगवान नानी बाई के ससुराल पक्ष के लिए एक से बढ़कर एक वस्तुएं लेकर आए। कथा के विश्राम पर व्यासपीठ की महाआरती हुई एवं महाप्रसादी वितरित की गई। अंत में कथा के विश्राम पर कांग्रेस नेता राजवीरसिंह बघेल, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष बरोठा राजेश पटेल ने कथावाचक शिवम बापू का स्वागत कर आशीर्वाद लिया एवं व्यासपीठ की महाआरती की। महाप्रसादी वितरित की गई।

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