शक्ति है तो ब्रह्मांड और सृष्टि है, शक्ति के बिना संसार की कल्पना नहीं कर सकते- भागवत भूषण शुभम कृष्ण दुबे

देवी भागवत कथा के दौरान मां चामुंडा सेवा समिति ने किया कथावाचक का सम्मान
देवास। स्थानीय मल्हार रोड पर भागवत भूषण शुभम कृष्ण दुबे के श्रीमुख से बह रही श्रीमद् देवी भागवत कथा रूपी ज्ञान गंगा में सैकड़ों धर्मप्रेमी डुबकी लगाकर अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं। कथा के दौरान मां चामुंडा सेवा समिति ने समिति संयोजक रामेश्वर जलोदिया के नेतृत्व में कथावाचक भागवत भूषण श्री दुबे एवं आयोजक मंडल के सरोज बजरंग बैरवा का शाल, श्रीफल, पगड़ी, मां की चुन्नी व पुष्पमालाओं से स्वागत किया।
मां की महिमा का वर्णन करते हुए भागवत भूषण शुभम कृष्ण दुबे ने कहा कि हजारों लक्ष्मी का तेज भी मां भगवती के सामने फीका पड़ जाता है। जिसके दर्शन करने के लिए देवता भी आतुर रहते हैं। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्माजी कहते हैं कि हमारी दृष्टि जब मां के स्वरूप पर पड़ी तो देखा कि मां के एक नाखून के अंदर हजारों ब्रह्मा, विष्णु और महेश देखे गए। ब्रह्माजी ने कहा कि हमारे पहले भी कई ब्रह्मा, विष्णु और महेश थे। वास्तव में जो सर्वोच्च शक्ति है, वह मां भगवती ही है। सत्य केवल मां ही है। जो हम दृष्टि से देख रहे हैं सब झूठ है क्योंकि शरीर के अंदर जो शक्ति है, वह हम नहीं देख पाते हैं। शक्ति है तो जगत है, शक्ति है तो ब्रह्मांड है, शक्ति हैं तो संसार है। शक्ति के बिना संसार की कल्पना भी नहीं कर सकते।
शुभम कृष्ण दुबे ने मां चामुंडा सेवा समिति की अनुकरणीय सेवाओं को कृतार्थ करते हुए कहा कि हम अहो भाग्य मानते हैं कि हम मां चामुंडा की नगरी में देवी भागवत की कथा सुना रहे हैं। मां चामुंडा सेवा समिति के जो सेवक हैं, वह मां के सच्चे लाल हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे मां चामुंडा इस दास पर अनुग्रह करने प्रकट हुई है। इस दौरान पंडित दुबे ने भक्ति गीत सच्ची है तू, सच्चा तेरा दरबार माता रानीयें की भावपूर्ण प्रस्तुति दी तो श्रद्धालु भावविभिर हो गए।
उदासीन मठ के स्वामी पूर्णानंदजी महाराज के सानिध्य में आयोजक मंडल के सरोज बजरंग बैरवा व मां चामुंडा सेवा समिति के रामेश्वर जलोदिया, नरेंद्र मिश्रा, उम्मेदसिंह राठौड़, दिनेश सांवलिया, शशिकांत गुप्ता, राधेश्याम बोडाना, मातृशक्ति मंजू जलोदिया, प्रेमलता चौहान, सुधा सोलंकी ने व्यासपीठ की पूजा अर्चना की। सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया।




