धर्म-अध्यात्म

यह तन मिट्टी में मिल जाएगा, जाग जाओ उससे पहले

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– सद्गुरु मंगल नाम साहेब का आत्मबोध का संदेश

– गुरु सिंघ सभा ने प्रकाश पर्व पर निकलने वाले नगर कीर्तन के लिए दिया आमंत्रण

देवास। “चादर हो गई बहुत पुरानी, अब सोच समझ अभिमानी…” कबीर साहेब के इस अमर वचन को आत्मसात कर सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने मानव जीवन की नश्वरता और आत्मज्ञान के महत्व पर गूढ़ प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि यह शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाने वाला है, फिर भी मनुष्य अहंकार, लोभ और मोह में डूबा हुआ है। इससे पहले कि यह जीवन समाप्त हो जाए, आत्मचिंतन और सत्य के मार्ग पर चलना ही वास्तविक जागृति है।

सद्गुरु ने कहा कि यह शरीर एक सुंदर नगर की तरह है, जिसमें सद्गुणों की अमूल्य संपत्ति विद्यमान है, लेकिन जब मनुष्य सावधान नहीं रहता, तो काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे चोर भीतर प्रवेश कर जाते हैं। ये चोर हथियार लेकर नहीं आते, न ही कोई शोर मचाते हैं, बल्कि भीतर की चेतना को ही लूट लेते हैं। जब यह लूट होती है, तब मनुष्य के पास न सुख बचता है, न शांति, न पहचान।

उन्होंने कहा कि यह जीवन बार-बार नहीं मिलता। धन, वैभव, पद और प्रतिष्ठा सब यहीं छूट जाते हैं। अंत में केवल आत्मा का सत्य ही साथ जाता है। सद्गुरु के अनुसार, सच्चा आनंद केवल सत्य नाम के सुमिरन में है, न कि सांसारिक भोगों में। आत्म तत्व को जानने के लिए सत्संग और गुरु की शरण ही एकमात्र मार्ग है।

गुरु सिंघ सभा द्वारा दिया गया आमंत्रण-
यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में 28 दिसंबर को निकलने वाले नगर कीर्तन के लिए  गुरु सिंघ सभा द्वारा आमंत्रण देने के वक्त कहे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आध्यात्मिक अवसर का लाभ लेकर जीवन के सत्य को समझ सकें।

अंत में सद्गुरु ने कहा “सत्य यही है कि यह तन खाक में मिल जाएगा, इससे पहले कि देर हो जाए, जाग जाओ।” यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

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