
देवास। आनंद मार्ग प्रचारक संघ देवास के हेमेन्द्र निगम काकू ने बताया कि, आनंद मार्ग ज़ूम जागृति प्लेटफ़ार्म पर “विश्व परिकल्पना में आनंद मार्ग की भूमिका” नाम से एक सिंपोजियम मानव कल्याण हेतु आयोजित किया गया। यह प्रोग्राम आनंद मार्ग की आध्यात्मिक फिलॉसफी कैसे इंसानियत को एक एकजुट, शांतिपूर्ण दुनिया की ओर ले जा सकती है, और भौतिक और आध्यात्मिक, दोनों तरह की ज़रूरतों को पूरा कर सकती है, पर आधारित रहा।
परिचय अजय दादा द्वारा प्रदान किया गया। आनंद मार्ग गुरुकुल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर आचार्य शंभूशिवानंद अवधूत दादाजी द्वारा मार्ग गुरुदेव श्रीश्री आनंदमूर्तिजी को दीप प्रज्वल्लन करते हुए औपचारिक रूप से प्रारम्भ किया गया है। नवल दादा ने प्रभात संगीत प्रस्तुत करते हुए सभी को आध्यात्मिक तरंग का अहसास करवाया गया।
मुख्य अतिथि कृष्णकांत मिश्रा ने अपने उद्बोधन में मानवता के भौतिकवादी दुनिया को देखने के नज़रिए की सीमाओं पर चर्चा करते हैं, और स्वार्थी हितों से सामूहिक भलाई की ओर जाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं। वे शांति पाने और दुख कम करने के तरीके के तौर पर निजी नतीजों को भगवान को सौंपने (कृष्णार्पण) के कॉन्सेप्ट पर ज़ोर देते हैं। पूरी तरह से आध्यात्मिक विस्तार का रास्ता ही सभी के लिए कल्याणकारी।

मंजिरी निधि दीदी ‘गुल’ साहित्यकार व बिजनेस वूमैन, किशोर जैन यूके (टीवी रेडियो रिप्रेंजेटर तथा राजश्री दीदी (सामाजिक कार्यकर्ता) बताते हैं कि कैसे रोज़ाना आध्यात्मिक अभ्यास से मन का विस्तार होता है, जिससे विश्व बंधुत्व बढ़ता है और जानवरों और प्रकृति सहित सभी प्राणियों के लिए बिना शर्त प्यार होता है।
प्रउत की सामाजिक-आर्थिक फिलॉसफी पर चर्चा करते हुए आचार्य शंभूशिवानंद अवधूत ने सीमित भावनाओं (जियो-सेंटीमेंट्स, सामाजिक-सेंटीमेंट्स) से आगे बढ़ने की ज़रूरत पर चर्चा करते हैं और सभी की भलाई के लिए दुनिया के संसाधनों को मैनेज करने के एक बड़े तरीके के तौर पर प्रोग्रेसिव यूटिलाइज़ेशन थ्योरी (PROUT) की रूपरेखा बताते हैं। आचार्य ने मानवता को प्राउत, नव्यमावता और तंत्र साधना से जीवन का प्रतिदिन संचालन करना ही कल्याणकारी हैं।
सिंपोजियम का समापन व्यक्तिगत आध्यात्मिक अभ्यास और मानवता के प्रति समर्पण के ज़रिए समाज को बदलने के लिए कार्रवाई करने के आह्वान के साथ दिनेश दादा ने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रदान किया। इसके बाद कीर्तन और ध्यान किया गया, जिसका मूल निहितार्थ ही मानव कल्याण की भावना है। यह भाव व्यक्त करते हुए व्यंजना आनंद दीदी ने सभी से प्रत्येक कार्य परमात्मा को साक्षी मानते हुए करने का दृढ़ विश्वास व्यक्त किया जिससे सम्पूर्ण मानवता कल्याणकारी पथ का निर्माण करे।





