गुरु पूर्णिमा पर विशेष: कच्ची मिट्टी को आकार देने वाले गुरु

– शिक्षक संतोष कुमार धनवारे की प्रेरणादायी कहानी
भोपाल/सीहोर। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु-शिष्य परंपरा की महान विरासत को नमन करने का अवसर होता है। ऐसे ही एक प्रेरणादायक शिक्षक हैं सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील (नसरुल्लागंज) के माध्यमिक शिक्षक संतोष कुमार धनवारे, जिन्होंने शिक्षक धर्म का निर्वाह केवल शिक्षण कार्य तक सीमित न रखते हुए, विद्यार्थियों के संपूर्ण जीवन निर्माण को अपना लक्ष्य बनाया।
बच्चों के सपनों को मिले पंख
श्री धनवारे ने अपने क्षेत्र के दर्जनों बच्चों पर अनेक नवाचारी शैक्षणिक प्रयोग कर उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक बनाया। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए “सपनों की डायरी”, फ्लैश कार्ड, टीचिंग लर्निंग मटेरियल और पोर्टफोलियो जैसे शैक्षणिक संसाधन स्वयं तैयार किए। ये सामग्री न केवल बच्चों की रचनात्मकता को उभारने का माध्यम बनी, बल्कि उन्हें लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में बढ़ने की प्रेरणा भी देती रही।
शिक्षा के साथ कला-संवर्धन
अपने शिक्षण संस्थान को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखते हुए, श्री धनवारे ने स्कूल में चित्रकला, रंगरोगन और कला कौशल के माध्यम से विद्यालय का वातावरण पूरी तरह बदल दिया। इस कार्य के लिए उन्होंने निजी खर्चे से स्कूल को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका यह प्रयास रंग लाया, और शासन द्वारा उनके विद्यालय को विकास के लिए 5 लाख की राशि प्रदान की गई।
शिक्षण से अधिक है संवाद
श्री धनवारे सिर्फ शिक्षक नहीं, एक मार्गदर्शक और परिवार का सदस्य बनकर विद्यार्थियों से जुड़े। वे न केवल छात्रों के साथ घुल-मिल गए बल्कि अभिभावकों के साथ भी संवाद स्थापित किया, जिससे बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा और भी सशक्त हुई।
उनके सिखाने के अंदाज़ ने “टाटा ट्रस्ट की पराग पत्रिका” में भी स्थान पाया, जो उनके कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का प्रमाण है।
एक शिक्षक, जो रच रहा है भविष्य
श्री धनवारे के पढ़ाए छात्र आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के पथ पर अग्रसर हैं। उनका मानना है कि “बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, जिन्हें एक अच्छा शिक्षक अपने परिश्रम और लगन से उत्तम सांचे में ढाल सकता है।”
गुरु पूर्णिमा पर प्रेरणा का संदेश
आज जब हम गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरु की महत्ता को याद कर रहे हैं, तब संतोष कुमार धनवारे जैसे शिक्षक हमें यह बताते हैं कि एक सच्चा गुरु केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है, सपनों को आकार देता है और भविष्य को दिशा प्रदान करता है।
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं उन सभी गुरुओं को, जो हर दिन किसी न किसी जीवन को संवार रहे हैं।




