भागवत कथा श्रवण से मिलता है जन्म-मृत्यु के भय से मुक्ति का मार्ग- पूजा शर्मा

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मनाया नंदोत्सव
हाटपिपल्या (नरेंद्र ठाकुर)। ग्राम लिम्बोदा स्थित पाटीदार धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भक्तिमय वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
कथा पांडाल में “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंज उठे। ढोल-धमाके और भजनों की मधुर धुन पर महिला, पुरुष और बच्चों ने नृत्य कर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।
कथावाचिका पूजा शर्मा (पुंजापुरा) ने कथा के दौरान भरत-शत्रुघ्न संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को संसार में रहते हुए भी भगवान का स्मरण और भजन करते रहना चाहिए। भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति ही दुखों का कारण बनती है, जबकि ईश्वर भक्ति जीवन में शांति, संतोष और आत्मिक आनंद प्रदान करती है।
उन्होंने समुद्र मंथन, कच्छप अवतार और मोहिनी अवतार की कथाओं का वर्णन करते हुए बताया, कि देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए अपने कंठ में धारण किया था। वहीं महालक्ष्मी ने भगवान विष्णु का वरण कर धर्म और मर्यादा का संदेश दिया।
कथावाचिका ने कहा कि आज के दौर में मनुष्य तनाव, प्रतिस्पर्धा और भौतिक सुखों की दौड़ में मानसिक शांति खोता जा रहा है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति को सकारात्मक सोच, संस्कार, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों से जुड़ने का आह्वान किया।
पूजा शर्मा ने कहा कि देवताओं ने अमृत पान किया था, लेकिन उससे भी श्रेष्ठ श्रीमद्भागवत कथा का अमृत है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का विकास होता है तथा जन्म-मृत्यु और सुख-दुख के भय से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। श्रद्धालु पालने में विराजित लड्डू गोपाल के दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे। जन्मोत्सव के उपरांत सभी भक्तों को माखन, मिश्री एवं पंचमेवा प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में श्रीमद्भागवत कथा की आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ प्राप्त किया।



