खेत-खलियानदेवास

बारिश से लहलहाई सोयाबीन-मक्का, किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रुक-रुककर हो रही बारिश बनी संजीवनी, लेकिन अच्छी रबी फसल के लिए अभी और पानी का इंतजार

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बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। जिन खेतों की मिट्टी बारिश का इंतजार कर रही थी, वहीं अब हरियाली की चादर बिछी नजर आ रही है। आसमान से रुक-रुककर बरसती बारिश ने केवल खेतों की प्यास ही नहीं बुझाई, बल्कि हजारों किसानों के चेहरों पर भी उम्मीद की मुस्कान लौटा दी है।

सोयाबीन और मक्का की फसलों में नई जान आ गई है। खेतों में लहलहाती हरियाली इस बात का संकेत दे रही है कि समय पर हुई बारिश ने खेती को नई ऊर्जा दी है।

बेहरी क्षेत्र में करीब 3,500 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है, जिस पर 5 हजार से अधिक किसानों का भविष्य टिका है। इसके अलावा मक्का, मूंगफली, लाल तुअर और उड़द की फसलें भी इस बारिश से लाभान्वित हुई हैं। किसानों का कहना है कि इस समय मिला पानी किसी अमृत से कम नहीं है।

खेतों की तस्वीर बदल गई
करीब 20 से 22 दिन की हो चुकी सोयाबीन अब तेजी से बढ़ रही है। अधिकांश किसानों ने निंदाई और खरपतवार नियंत्रण का काम भी पूरा कर लिया है। मक्का की फसल भी अच्छी बढ़वार दिखा रही है। खेतों में दूर-दूर तक फैली हरियाली किसानों के आत्मविश्वास को मजबूत कर रही है।

उम्मीद के साथ चिंता भी बाकी
हालांकि किसानों का मानना है कि यह राहत अभी अधूरी है। वरिष्ठ किसान रामेश्वर सेठ, पूर्व सरपंच रामचंद्र दांगी, दरियाव सिंह पाटीदार, विक्रम भगत, महेंद्र दांगी और केदार पाटीदार का कहना है कि खरीफ फसल की बेहतर पैदावार और आने वाली रबी फसल के लिए जिले में करीब 36 इंच वर्षा आवश्यक है। यदि आने वाले दिनों में भी इसी तरह समय-समय पर बारिश होती रही, तो किसानों को अच्छा उत्पादन मिलने की उम्मीद है।

क्या कहते हैं आंकड़े:
▪️3-4 दिन से रुक-रुककर बारिश।
▪️3,500 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती।
▪️5,000+ किसान सीधे लाभान्वित।
▪️सोयाबीन की फसल 20-22 दिन की अवस्था में।
▪️मक्का, मूंगफली, उड़द और लाल तुअर को भी मिला फायदा।
▪️किसानों कहते हैं—रबी फसल के लिए अभी और बारिश जरूरी।

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