‘जहां चाह, वहां राह’ को श्रेयांश ने किया साबित, बिना कोचिंग हासिल किया IIM सिरमौर में प्रवेश

धावड़िया के होनहार ने घर पर स्टडी से रचा इतिहास, कड़ी मेहनत और लगन से पूरा किया IIM का सपना
बेहरी। सफलता केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और अथक मेहनत की मोहताज होती है। इस बात को ग्राम पंचायत मुख्यालय धावड़िया के होनहार छात्र श्रेयांश चौहान ने सच साबित कर दिखाया है।
बिना किसी महंगी कोचिंग का सहारा लिए, केवल घर पर लगातार मेहनत, नियमित अध्ययन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में प्रवेश के लिए पात्रता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
श्रेयांश ने इससे पहले केंद्रीय विद्यालय से सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। अब देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में शामिल IIM तक पहुंचकर उन्होंने अपनी मेहनत को नई पहचान दिलाई है।
घंटों की पढ़ाई, अनुशासन और आत्मविश्वास बना सफलता की कुंजी-
श्रेयांश ने बताया कि आर्थिक और अन्य कारणों से वे किसी कोचिंग संस्थान में प्रवेश नहीं ले सके। ऐसे में उन्होंने हार मानने के बजाय घर पर ही नियमित अध्ययन, स्वयं नोट्स तैयार करने, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मॉक टेस्ट के माध्यम से तैयारी शुरू की। कई महीनों तक लगातार घंटों पढ़ाई, समय का अनुशासित प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें सफलता की मंजिल तक पहुंचा दिया।
उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो बिना कोचिंग के भी बड़ी से बड़ी परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
माता-पिता का मिला हर कदम पर साथ-
श्रेयांश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षक पिता शांतिलाल चौहान और माता सुनीता चौहान को दिया। उन्होंने बताया कि माता-पिता ने हर कठिन समय में उनका मनोबल बढ़ाया और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पिता शांतिलाल चौहान ने भावुक होकर कहा कि आज उनके बेटे ने “जहां चाह, वहां राह” कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं, यदि इंसान के इरादे मजबूत हों।
बागली क्षेत्र के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत-
श्रेयांश की उपलब्धि पर पारिवारिक मित्र वारिस अली, हीरालाल गोस्वामी, वासुदेव जोशी, राकेश नागोरी सहित क्षेत्र के अनेक लोगों ने परिवार को बधाई दी।
सभी ने इसे पूरे बागली क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि श्रेयांश ने यह साबित कर दिया है कि बड़े सपने गांव से भी पूरे किए जा सकते हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों को कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नई प्रेरणा देगी।




