विवाह के शुभ अवसर पर पौधारोपण कर हरियाली बचाने का दिया संदेश

देवास। शहर में विवाह समारोह को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए पौधारोपण की अनूठी पहल की गई। इस दौरान लोगों ने बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली के बीच पेड़ लगाने का संकल्प लिया और समाज को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।
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विवाह जैसे पवित्र और यादगार अवसर को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए शहर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। बुद्धसेन पटेल द्वारा विवाह समारोह के दौरान पौधारोपण कर समाज को हरियाली और प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस अवसर पर अल्का पटेल, सुमन पटेल, रंजना पटेल, पारुल पटेल, सुनील पटेल, संजय पटेल, प्रकाश पटेल, अनिल पटेल, अतुल पटेल सहित कई नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इस पहल को सफल बनाया।
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कार्यक्रम के दौरान नवविवाहित जोड़े अंकिता एवं मनीष पटेल ने भी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन के खास अवसरों जैसे विवाह, जन्मदिन या वर्षगांठ पर एक-एक पौधा अवश्य लगाएं, ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल पेड़ नहीं, बल्कि भविष्य की सांस है।
इस अवसर पर बुद्धसेन पटेल ने पौधारोपण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी बन चुका है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटती हरियाली के कारण मानव जीवन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यदि हम अभी से नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ हवा और जल के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। एक पौधा लगाना छोटा प्रयास जरूर है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। यह न केवल ऑक्सीजन देता है, बल्कि धरती को संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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उन्होंने आगे कहा, कि विवाह जैसे शुभ अवसरों पर पौधारोपण करने से यह संदेश समाज में तेजी से फैल सकता है और लोग इसे अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हर खुशी के मौके पर एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी देखभाल भी करें।
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कार्यक्रम में “सहयोग सबका सहारा सोशल वेलफेयर सोसायटी” का विशेष योगदान रहा, जिसने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के सदस्यों ने बताया कि वे आगे भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें। यदि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर किए जाएं, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।




