देवास

प्रकृति का ऋण चुकाने का समय; आरक्षित भूमियों पर ही हो सघन पौधारोपण

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देवास (ललित चौहान)। प्रकृति से हमने जो लिया है, उसे लौटाना हमारा नैतिक कर्तव्य है। हमारे शास्त्रों में ऋषि-मुनियों ने प्रकृति को पूजनीय माना है, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हम इस संतुलन को भूल गए हैं। देवास शहर की वर्तमान स्थिति, विशेषकर वायु प्रदूषण को देखते हुए अब यह अनिवार्य हो गया है कि हम ‘ग्रीन देवास’ के संकल्प को धरातल पर उतारें।

दुर्भाग्यवश, देवास में वृक्षों के लिए आरक्षित भूमियों का सबसे अधिक दुरुपयोग देखा गया है। बफर जोन की कमी और हरियाली का घटता दायरा शहर के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। अब समय आ गया है कि शेष बची आरक्षित भूमियों पर वातावरण के अनुकूल सघन पौधारोपण किया जाए।

सही स्थान पर पौधारोपण है स्थायी समाधान-
पौधारोपण केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। अक्सर गलत स्थान पर लगाए गए पौधों को भविष्य में ‘विकास’ के नाम पर काट दिया जाता है। इससे न केवल मेहनत बेकार जाती है, बल्कि समय की भी हानि होती है।

उन्हीं भूमियों पर पौधारोपण को प्राथमिकता दे जो वृक्षों के लिए आरक्षित हैं, ताकि वर्षों की मेहनत से तैयार वृक्ष भविष्य में सुरक्षित रहें।

विभागों का संयुक्त दौरा और वैज्ञानिक चयन-

आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए संबंधित विभागों को एक साझा रणनीति बनानी चाहिए।

निरीक्षण: देवास-इंदौर, देवास-मक्सी, देवास-उज्जैन और देवास-भोपाल जैसे प्रमुख मार्गों का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जाए।

चयन: पौधारोपण के लिए आरक्षित भूमियों को चिन्हित कर वहां की मिट्टी और वातावरण के अनुकूल स्थानीय प्रजातियों के पौधों का चयन हो।

प्रकृति हमें शुद्ध वायु और जीवन देती है। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने जीवनकाल में अधिक से अधिक वृक्ष लगाएं और उन्हें पाल-पोसकर बड़ा करें, ताकि आने वाली पीढ़ी को एक शुद्ध और सुरक्षित वातावरण विरासत में मिल सके।

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