धर्म-अध्यात्म

Dewas news अमृतवाणी राम नाम का सागर है- नागर भाई जी।

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देवास। अमृतवाणी ग्रंथ स्वामी श्री सत्यानंद जी महाराज को प्रभु श्रीराम द्वारा प्रदत्त अमृत सागर है। राम नाम अमृत रस सार, देता परम आनंद अपार।

स्वामी सत्यानंद जी महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर 7 जनवरी 1925 की गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान राम ने आत्म कल्याण और जनकल्याण हेतु अमृतवाणी का प्रसाद दिया। पूरी दुनिया में श्री राम शरणम् आश्रमों में लाखों भाई-बहन इस पवित्र वाणी का पाठ करते हैं।

ये विचार ग्राम रतनखेड़ी में आयोजित श्री हनुमान जन्मोत्सव और स्वामी जी महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर श्री राम शरणम् आश्रम देवास के इंद्रजीत सिंह नागर भाईजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा और विश्वास जगाने वाला अमृतवाणी एक अद्भुत और अनुपम ग्रंथ है। लगभग 45 मिनट गायन से साधक आत्मविभोर हो जाते हैं।

राम नाम की पतित पावनी ध्वनि जीव मात्र को पावन और पाप मुक्त करती है। श्री हनुमान जी तो निरंतर अविरल राम नाम का ही सिमरन करते हैं। राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा। श्री हनुमान जी भक्ति, सेवा, विनम्रता और निर अभिमानता के प्रेरक है। वे बल बुद्धि और विद्या के दाता है। केवल हनुमान जी को हाथ जोड़ना, प्रणाम करना पर्याप्त नहीं है उनके जैसे सद्गुण प्राप्त करके ही हम राम को रिझा सकते हैं।

आरती पश्चात ग्राम रतनखेड़ी के साधकों ने विभिन्न गांवों से आए साधकों का आभार व्यक्त किया। जानकारी श्रीराम शरणम के प्रादेशिक प्रचार प्रमुख डॉ. सुरेश गुर्जर ने दी।

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