श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गणगौर पर्व, सुहागिनों ने पति की दीर्घायु के लिए पूजा-अर्चना की

सिरोल्या (अमर चौधरी)। लोक आस्था और संस्कृति का प्रतीक गणगौर का पर्व आज पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं ने ईसर-गणगौर (भगवान शिव और माता पार्वती) की विधि-विधान से पूजा की और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा।
परंपरा और विधि-
सुबह से ही घरों और मंदिरों में उत्सव का माहौल रहा। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार कर सामूहिक रूप से गणगौर माता की पूजा की। पूजा के दौरान पारंपरिक लोक गीतों जैसे “खेलां दो गणगौर भंवर म्हाने खेलण दो गणगौर” से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। महिलाओं ने मिट्टी से बनी मूर्तियों को फल, फूल और विशेष रूप से बनाए गए ‘गुने’ का भोग लगाया।
कुंवारी कन्याओं में भी दिखा उत्साह-
मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं जहाँ पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए गणगौर की उपासना करती हैं। पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग की मंगल कामना की।




