धर्म-अध्यात्म

जीवन-मरण, यश- अपयश विधि हाथ- नागर भाई जी

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टोंकखुर्द (विजेंद्र सिंह ठाकुर)। समीप के गोरवा गांव में एकदिवसीय अमृतवाणी राम नाम सत्संग का आयोजन हुआ।

कई बार नियति बहुत कठोर होती है और यह पहले से ही निर्धारित होती है। इसे बदला नहीं जा सकता, बल्कि स्वीकार करना पड़ता है। श्री वशिष्ठ ऋषि रघुकुल के कुलगुरु श्री भरत जी से कहते हैं कि है भारत राम का वन जाना, राजा दशरथ का मरण विधि का विधान है।

सुनहु भरत भावी प्रबल, विलख कहहु मुनिनाथ।
लाभ-हानि, जीवन-मरण यश-अपयश विधि हाथ।।
ये विचार ग्राम गोरवा में श्री चंदरसिंह के दिवंगत पुत्र विशाल की पुण्यतिथि पर आयोजित एकदिवसीय अमृतवाणी राम नाम सत्संग में देवास श्री राम शरणम् आश्रम से पधारे इंद्र सिंह नागर भाई जी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि परमात्मा के नाम में बहुत शक्ति है। दिवंगत आत्मा के लिए परमात्मा से प्रार्थना करें, उसे सद्गति मिले और परिवार में आप सभी परमात्मा के नाम का सिमरण करते हुए आगे बढ़े। जो गया वह बहुत था लेकिन जो बचा है वह भी कम नहीं है। उसे संभालो और संवारो।

आपका परिवार राष्ट्र आराधना के साथ-साथ राम आराधना में भी सदैव तत्पर रहता है। परमात्मा की असीम कृपा आपके परिवार पर सदैव ऐसी बनी रहे ऐसी गुरु महाराज से हम प्रार्थना करते हैं। आरती के पश्चात चंदर सिंह जी ने पधारे हुए सभी साधक बंधुओं का आभार व्यक्त किया।

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