महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बनेगा अद्भुत संयोग
चतुर्ग्रही योग सहित आठ महा संयोगों का दुर्लभ समागम

शिव-पार्वती के साथ लक्ष्मी-नारायण की विशेष कृपा
देवास। वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि इस बार अत्यंत विशेष और दुर्लभ मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार लगभग 300 वर्ष बाद ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है, जब महाशिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग के साथ आठ महासंयोगों का समागम हो रहा है।
मान्यता है कि इस दिव्य अवसर पर भगवान शिव एवं माता पार्वती के साथ-साथ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा भक्तों पर बरसेगी। श्री सनातन ज्योतिष व अनुष्ठान केंद्र के वैदिक आचार्य पं. संदीप शास्त्री ने बताया, कि पौराणिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति वर्षभर कोई व्रत-उपवास न भी करे, लेकिन केवल महाशिवरात्रि का व्रत श्रद्धा और विधि-विधान से कर ले, तो उसे वर्षभर के व्रतों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
पं. शास्त्री के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि पर निम्न आठ प्रमुख योगों का संयोग बन रहा है चतुर्ग्रही योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, व्यतिपात योग, बुधादित्य योग, लक्ष्मी नारायण योग, शुक्र आदित्य योग, महालक्ष्मी योग,श्रवण नक्षत्र योग।
विशेष रूप से लक्ष्मी नारायण योग और महालक्ष्मी योग के प्रभाव से इस बार महाशिवरात्रि पर माता लक्ष्मी और भगवान नारायण की विशेष कृपा प्राप्त होगी। इन दुर्लभ संयोगों के कारण यह पर्व आमजन के लिए अत्यंत फलदायी और मंगलकारी माना जा रहा है। महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण कर चार प्रहर की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पं. शास्त्री ने पूजा के चार प्रहरों का समय इस प्रकार बताया कि प्रथम प्रहर: सायं 6:39 बजे से रात्रि 9:45 बजे तक, द्वितीय प्रहर: रात्रि 9:45 बजे से 12:50 बजे तक, तृतीय प्रहर: रात्रि 12:50 बजे से प्रातः 3:58 बजे तक एवं चतुर्थ प्रहर: प्रातः 3:58 बजे से 7:05 बजे तक रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया है कि इस दुर्लभ और पावन अवसर पर विधि-विधान से व्रत, पूजन और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करें तथा इस दिव्य महासंयोग का पुण्य लाभ प्राप्त करें।




