घर-घर में देव संस्कृति स्थापित करना गायत्री परिवार का लक्ष्य- दिव्या तांबड़े
देव संस्कृति विश्व विद्यालय हरिद्वार का सामाजिक विषयों पर लगातार मंथन और समाधान

नगर और ग्राम में लगातार धर्म की चेतना को जगाने का प्रयास
देवास। देव संस्कृति विश्व विद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार से सामाजिक परिवीक्षा पर आई छात्राओं द्वारा गायत्री शक्तिपीठ देवास के माध्यम से नगर ग्राम के घर-घर में देव संस्कृति स्थापित करने एवं आम लोगों को देव संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से लगातार गायत्री महायज्ञ, दीपयज्ञ, उद्बोधन, संबोधन के आयोजन किए जा रहे हैं।
गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी विक्रमसिंह चौधरी ने बताया कि एक माह की सामाजिक परिवीक्षा के अंतर्गत देव संस्कृति विश्व विद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार से आई छात्राओं द्वारा लगातार विद्यालय, महाविद्यालय एवं सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महज 12 दिनों में रिकॉर्ड 40 सामूहिक रूप से स्कूल, कॉलेज एवं नगर, ग्राम में गायत्री महायज्ञ, दीपयज्ञ, उद्बोधन, संबोधन के आयोजन संपन्न किए हैं।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार (DSVV) की छात्रा दिव्या तांबडे का कहना है कि गायत्री परिवार का लक्ष्य युवाओं को श्रेष्ठ नागरिक, समर्पित स्वयंसेवक और राष्ट्रभक्त बनाकर ‘देव-मानव’ बनाना है, ताकि गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी का सपना ” मनुष्य में देवत्व का उदय एवं धरती पर स्वर्ग का अवतरण” साकार हो सके, जिसमें भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर फैलाकर वैश्विक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण लाया जा सके। यह शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, जीवन प्रबंधन और मानवीय मूल्यों के विकास पर केंद्रित है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार (DSVV) की छात्रा हर्षिता चौहान एवं कु. वर्षा कुमारी का कहना है कि युवाओं को ऐसे नागरिक बनाना है जो “मनुष्य में देवत्व उतारें”। राष्ट्र और विश्व का मार्गदर्शन कर भारत को पुनः जगतगुरु बनाने और विश्व का मार्गदर्शन करने की दिशा में काम करें। गायत्री परिवार का मुख्य उदेश्य विद्यार्थियों का शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास कर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण कर भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर एक बेहतर समाज, राष्ट्र एवं विश्व का निर्माण करना है।

प्रज्ञापीठ संरक्षिका दुर्गा दीदी एवं युवा प्रकोष्ठ जिला समन्वयक प्रमोद निहाले ने संक्षेप में बताया कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे ‘देव-मानव’ तैयार करना है जो अपनी संस्कृति और मूल्यों के आधार पर समाज और विश्व में सकारात्मक बदलाव ला सकें, जिससे धरती पर स्वर्ग का सपना साकार हो सके।
इन आयोजनों में गायत्री परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्ता रमेशचंद्र मोदी, कन्हैयालाल मोहरी, रामनिवास कुशवाह, कांतिलाल पटेल, रमेश नागर, प्रदीप दुबे, देवीशंकर तिवारी, हजारीलाल चौहान, सालिगराम सकलेचा, लक्ष्मण पटेल, विक्रमसिंह चौधरी आदि का सराहनीय सहयोग मिल रहा है।




