धर्म-अध्यात्म

गुरु-संतों और माता-पिता से जुड़े रहने में ही सच्चा सुख: सद्गुरु मंगल नाम साहेब

Share

 

देवास। “जो लोग गुरु-संतों, माता-पिता और अपने संस्कारों से जुड़े रहते हैं, वे जीवन में कभी दुखी नहीं होते। कटाव ही दुख का कारण बनता है।”

यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने गुरुवाणी पाठ एवं गुरु-शिष्य संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन सद्गुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थली सेवा समिति, मंगल मार्ग टेकरी द्वारा किया गया।

संसार के पीछे दौड़ या परमात्मा से जुड़ाव? जानिए जीवन का असली ठिकाना

सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने कहा कि जैसे पेड़ अपनी जड़ों और धरती से जुड़े रहने के कारण तेज गर्मी में भी हरे-भरे बने रहते हैं, वैसे ही मनुष्य भी यदि अपने गुरु, संतों और माता-पिता से जुड़ा रहे तो जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि प्रेम, स्नेह और अपनापन ही जीवन को मजबूत बनाते हैं। जो लोग अपने मूल संस्कारों और परिवार से दूर हो जाते हैं, वे हमेशा सुख और सहारे की तलाश में भटकते रहते हैं।

सद्गुरु मंगलनाम साहेब के प्रेरक विचार: साधु वही जो साधकर पूर्णता को प्राप्त करें

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शरीर जब तक श्वास से जुड़ा है, तब तक उसमें चेतना बनी रहती है। उसी प्रकार जीवन में आध्यात्मिक और पारिवारिक संबंध व्यक्ति को ऊर्जा और आनंद प्रदान करते हैं।

सद्गुरु ने “सुनीति” और “सुरुचि” के अंतर को समझाते हुए कहा कि जो कार्य नीति और संयम के अनुसार किए जाते हैं, वे सुखदायी होते हैं, जबकि केवल स्वाद और इच्छाओं के पीछे किया गया आचरण अंततः दुख देता है।

धर्म और सेवा से जुड़ी खास खबर: दान-पुण्य का महत्व: चींटी को आटा खिलाने से क्या होता है?⁠

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि पेड़-पौधे और पक्षी भी हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि हम प्रकृति की सेवा करेंगे, पेड़ों को पानी देंगे और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करेंगे, तो प्रकृति भी हमें स्वस्थ और सुखद जीवन का आशीर्वाद देगी।
कार्यक्रम की जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

Back to top button