धर्म-अध्यात्म

आज के युवा भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर माता-पिता की आज्ञा का करें पालन- पं. पवन पांडे

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– सिरोल्या में श्रीराम कथा के पांचवे दिन कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु

सिरोल्या (अमर चौधरी)। अधर्म पर धर्म की विजय तथा परिवार में एकता-सद्भाव का संदेश मनुष्य जीवन का आधार है। ऐसे प्रेरणादायी संदेशों से सराबोर श्रीराम कथा के पांचवें दिन अम्बे माता चौक, सिरोल्या में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।

व्यासपीठ से कथा प्रवचन करते हुए सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. पवन पांडे ने कहा कि यदि आज का युवा अपने जीवन को सफल बनाना चाहता है, तो उसे प्रभु श्रीराम के चरित्र से सीख लेकर माता-पिता की आज्ञा पालन का संकल्प लेना चाहिए।

श्रीराम के वनवास से राजतिलक तक की प्रेरक कथा-
पंडित पांडे ने गुरुवार के दिवस में भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर राजतिलक तक के प्रसंगों को गंभीरता व भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा राजा दशरथ के चार पुत्रों में श्रीराम सबसे बड़े थे और वे हर पल अपने पिता दशरथ की आज्ञा का पालन करते थे। युवराज घोषित होने के बाद भी उनके स्वभाव में विनम्रता, सेवा और मर्यादा का भाव हमेशा रहा। पूरी अयोध्या राम के राजतिलक को लेकर उत्साहित थी, लेकिन कैकयी के वरदान की स्मृति ने दशरथ को विवश किया और राम को 14 वर्ष का वनवास देना पड़ा।

श्री पांडे ने बताया कि जैसे ही यह निर्णय सुनाया गया, श्रीराम ने बिना प्रश्न किए पिता की आज्ञा को स्वीकार किया, और वनवास के मार्ग पर निकल पड़े। उनके साथ माता सीता और भक्तवत्सल अनुज लक्ष्मण भी वनवास को गए।

उन्होंने कहा कि अयोध्या की प्रजा अपने प्रिय राम के साथ वन जाने को तैयार हो गई थी, परंतु श्रीराम ने सभी को समझाया कि पिता की आज्ञा सर्वोपरि है और वचन पालन ही सर्वोच्च धर्म है।

आधुनिक युवाओं को क्यों जरूरत है श्रीराम से सीखने की-
कथावाचक पांडे ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज कलयुग में कई युवा माता-पिता की बात तो दूर, उन्हें वृद्धाश्रम भेजने तक की सोच रखते हैं, जबकि श्रीराम ने अपने पिता की आज्ञा को निस्वार्थ भाव से स्वीकार किया।

उन्होंने कहा यदि युवाओं के जीवन में श्रीराम जैसी मर्यादा, आदर और अनुशासन आ जाए, तो परिवार मजबूत होगा, समाज में सद्भाव बढ़ेगा और राष्ट्र प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होगा।

कथा के अंत में पूर्व सरपंच राकेश मंडलोई एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की महाआरती की। इसके पश्चात भक्तों को महाप्रसादी वितरित की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान भजन, जयघोष और दीपों की आभा से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

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