धर्म-अध्यात्म

आषाढी पूर्णिमा पर कुल भैरव की पूजा की, गुड़, घी, धूप-पूजा के साथ लगाया भोग

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बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। गुरुवार को क्षेत्र में पूर्णिमा पर अधिकतर भैरव मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। ऐसे तो वर्षभर मांगलिक कार्य के दौरान भैरव स्थान पर पूजा पाठ होती है, लेकिन आषाढ़ी पूर्णिमा पर कुल भैरवों की पूजा करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।

बेहरी में स्थित रियासतकालीन प्राचीन भैरव महाराज के ओटले पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। यहां पर स्थित भैरव महाराज के विषय में पुजारी रामरतन पटेल ने बताया कि यह गारी (धनगर) समाज के भैरव महाराज सती है। शादी विवाह समारोह के दौरान यहां पर पूजा करना अनिवार्य माना गया है।

वैशाख के महीने में कई परिवार के लोग मान उतारने भी आते हैं। ऐसे ही प्राचीन सती माता का मंदिर स्कूल परिसर में भी है। यहां सैकड़ो की संख्या में देवास शाजापुर, सुजालपुर, सीहोर, मंदसौर, नीमच, इंदौर के श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। वही गुरु पूर्णिमा पर्व क्षेत्र में आस्था के साथ मनाया गया।

आसपास के मंदिर सहित गुराडिया आश्रम मंदिर पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वही छात्र-छात्राओं ने अपने स्कूली शिक्षक के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि भैरव महाराज को तेल लगी बाटी का एवं मदिरा का भोग लगाया जाता है। यह भोग फिर काले कुत्ते को खिलाया जाता है।

साथ ही कई घरों में इस पर्व पर प्रतीक भेरू के रूप में काली गिट्टी रखकर सिंदूर लगाकर पूजा करने की परंपरा का निर्वहन किया गया। पुजारी मुकेश महाराज ने बताया कि कुछ स्थानों पर भैरव को शराब भी चढ़ाई गई।

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