देवास

अमावस्या की रात शिप्रा नदी कुंड के पानी में डूबती महिला के लिए किया एक साहसी बचाव अभियान

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देवास। अमावस्या की स्याह रात में जब शिप्रा नदी के तट पर सन्नाटा पसरा था, तभी एक चीख ने अंधेरे को चीर दिया। यह चीख थी एक डूबती हुई महिला की, जो मदद की गुहार लगा रही थी।

संयोग से, मां क्षिप्रा नदी बचाओ समिति के अध्यक्ष राजेश बराना प्रजापति वहां मौजूद थे। बिना एक पल गंवाए महिला को बचाने का प्रयास किया।

रात के अंधेरे में जलती उम्मीद की लौ-
राजेश बराना ने सूझबूझ दिखाते हुए पहले महिला तक पहुंचने के लिए एक वस्तु फेंकी, फिर खुद पानी में उतरकर उसे बाहर निकाला। तब तक महिला के पेट में काफी पानी भर चुका था। इस कठिन घड़ी में सुमित जोशी और विनायक जोशी ने भी महिला के पेट से पानी बाहर निकालने में मदद की। तुरंत ही 108 एंबुलेंस और 100 डायल को सूचना दी गई, ताकि समय रहते चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।

महिला को बचाने के लिए जलती आग बनी सहारा-
महिला की हालत गंभीर थी, शरीर ठंडा पड़ चुका था। ऐसे में, पोलीथीन और अन्य कपड़ों से आग जलाकर उसे गर्म करने का प्रयास किया गया। होश में आने के बाद महिला ने अपना नाम संगीता बाई बताया। जल्द ही 100 डायल पुलिस और 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची। राजेश बराना प्रजापति, 108 के डॉक्टर रोहित सिंह राजपूत और ड्राइवर हितेश चौधरी के सहयोग से महिला को देवास जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल की अव्यवस्था बनी चुनौती-
अस्पताल में अव्यवस्था थी, जिससे मरीज के उपचार में परेशानी आई। फिर भी, सभी ने मिलकर महिला को जरूरी चिकित्सा उपलब्ध करवाई।

एक नहीं, कई जिंदगियों के रक्षक बने राजेश बराना-
यह पहला मौका नहीं था जब मां क्षिप्रा नदी बचाओ समिति ने इस तरह का सराहनीय कार्य किया हो। राजेश बराना अब तक कई लोगों की जान बचा चुके हैं। उनका यह साहसिक कार्य समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो दर्शाता है कि यदि हिम्मत और इंसानियत हो, तो किसी की जिंदगी बचाना संभव है। उनका यह प्रयास न केवल अनुकरणीय है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को जागरूक करने वाला भी है।

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