देवास

“एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम में देशभक्ति पर आधारित के गीतों की दी प्रस्तुति

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– शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के 94वें शहादत दिवस पर देवास में विचार गोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया

देवास। भारत की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के 94वें शहादत दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस यादगार कमेटी, देवास द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन गजरा गियर चौराहा स्थित शहीदों की प्रतिमा स्थल के पास किया गया, जहां सैकड़ों देशभक्तों ने शिरकत की।

कार्यक्रम की शुरुआत शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण से हुई। उपस्थित गणमान्य नागरिकों और देशभक्तों ने इन अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों और कविताओं की गूंज सुनाई दी। “मेरा रंग दे बसंती चोला”, “ए भगत सिंह तू जिंदा है”, “है प्रीत जहां की रीत सदा” जैसे जोशीले गीतों ने माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।

शुभम लोधी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए वीर शहीदों के बलिदान और उनकी विचारधारा को उजागर किया।

परिचर्चा में गूंजे शहीदों के विचार-
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने शहीदों के विचारों और उनके बलिदान की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

इस अवसर पर एडवोकेट राजुल श्रीवास्तव ने कहा कि शहीदों के विचार आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का बलिदान केवल आज़ादी के लिए नहीं था, बल्कि उन्होंने ऐसे भारत का सपना देखा था जहां किसी भी प्रकार का शोषण न हो, जाति-धर्म के नाम पर भेदभाव न हो। लेकिन आज भी समाज में शोषण व्याप्त है, और हम उनके सपनों के भारत से कोसों दूर हैं।

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वहीं, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भगत सिंह यादगार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेश शर्मा ने कहा, कि आज के समय में जब समाज नैतिक और सांस्कृतिक पतन की ओर बढ़ रहा है, तब भगत सिंह के विचार और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने कहा, आज के युवाओं के आदर्श फिल्मी सितारे और क्रिकेटर बन गए हैं, लेकिन हमें यह समझना होगा कि असली नायक वे हैं जिन्होंने अपने जीवन को राष्ट्रहित में समर्पित कर दिया। भगत सिंह ने हमें एक मिशन सौंपा था – अन्याय, शोषण और अत्याचार के खिलाफ लड़ने का। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनके विचारों को आत्मसात करें और समाज में व्याप्त बुराइयों का विरोध करें।

उन्होंने भगत सिंह के एक प्रसिद्ध कथन को उद्धृत करते हुए कहा, “मेरे तीन रिश्तेदार हैं – पहले वे जो करतार सिंह सराभा जैसे क्रांतिकारी हैं, दूसरे वे जो आज़ादी की लड़ाई में हमारे साथ जेलों में हैं, और तीसरे वे जो इस देश की माटी से जन्म लेकर हमारे मिशन को आगे बढ़ाएंगे।

लोकेश शर्मा ने युवाओं से आव्हान किया कि वे भगत सिंह के मिशन को आगे बढ़ाएं और समाज में बदलाव लाने की दिशा में कार्य करें।

भगत सिंह के पोस्टर का विमोचन-
कार्यक्रम के दौरान भगत सिंह के पोस्टर का विमोचन भी किया गया, जिसमें उनकी विचारधारा और बलिदान को चित्रित किया गया था। उपस्थित अतिथियों ने इस पोस्टर का अनावरण कर युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन विनोद प्रजापति ने किया। अंत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस यादगार कमेटी के अध्यक्ष मोहन जोशी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, कि इस तरह के आयोजनों से हमें शहीदों की विचारधारा को समझने और अपनाने का अवसर मिलता है। हम सभी का कर्तव्य है कि हम शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए कार्य करें और समाज को एक बेहतर दिशा में ले जाएं।

इस कार्यक्रम में देवास के अनेक समाजसेवी, युवा कार्यकर्ता, और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने शहीदों को नमन करते हुए उनके विचारों को अपनाने की शपथ ली।

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