धर्म-अध्यात्म

बचपन को प्रबुद्ध, जवानी को शुद्ध और बुढ़ापे को सिद्ध करना होगा- इंद्रसिंह नागर

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टोंकखुर्द (विजेंद्रसिंह ठाकुर)। व्यक्ति, वस्तु और व्यवस्था से सुखी नहीं हो सकता, जब तक उसका बौद्धिक स्तर ठीक न हो। कुविचारों से भरा व्यक्ति, वासना और व्यसन से ग्रस्त लोग, हिंसा से भरे लोग समाज और देश के लिए खतरा है।

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ये विचार ग्राम बरदू में आयोजित अमृतवाणी सत्संग में श्री रामशरणम देवास से पधारे इंद्रसिंह नागर भाईजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा, कि हम इस मानव समाज को सुविचारों से भरा हुआ, इन्सानियत से भरा हुआ, प्रेम से भरा हुआ छोड़कर जाए, उन मेहमानों के लिए जो हमारे बाद इस दुनिया में आने वाले हैं। इसके लिए बचपन को प्रबुद्ध करना पड़ेगा, युवान का शुद्ध करना पड़े‌गा और बुढ़ापे को सिद्ध करना पड़ेगा।

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उन्होंने कहा, कि समाज में सत्संग की बहुत जरूरत है। समाज नहीं संग बिगड़ा है। सत्संग से ही मनुष्य सुधरता है। कुसंग मनुष्य के जीवन को नर्क बना देता है। यदि जीवन आध्यात्मिक होगा तो लोगों के सद‌गुण भाएंगे। राष्ट्र और धर्म के प्रति कर्तव्य भाव जगेगा। यदि ऐसा नहीं होगा तो भविष्य में विचारहीन, गुणहीन लोग बड़े पदों पर बैठकर, देश और समाज के लिए क्या करेंगे। अध्यात्म के बगैर कुछ नहीं होगा। आरती पश्चात सत्संग समिति ने आभार व्यक्त किया। यह जानकारी डॉ. सुरेश गुर्जर ने दी।

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