धर्म-अध्यात्म

मोह-माया को छोड़े बिना सत्य की प्राप्ति असंभव – सद्गुरु मंगल नाम साहेब

Share

देवास। “मेरा-तेरा” की सीमाओं में बंधकर हम संसार की जकड़नों में उलझे हुए हैं। इन सांसारिक बंधनों से परे जाओ, उस असीम और व्यापक सत्य की ओर लौटो, जो श्वास-रूप में प्रवाहित हो रहा है।

सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने गुरुवाणी पाठ और गुरु-शिष्य चर्चा के दौरान यह प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक मोह-माया का त्याग नहीं करेंगे, तब तक सत्य की उपलब्धि असंभव है। आत्मा की पहचान किए बिना हम बाहरी भटकाव में उलझे रहते हैं। साहेब कहते हैं “संसार की भूख छोड़ो। यदि दो रुपए भी इकट्ठे कर लिए, तो वही मोह का कारण बन जाते हैं। फिर तुम सत्य को कैसे प्राप्त करोगे?”

सद्गुरु ने एक गहरी उपमा दी “नदी में नाव डूब सकती है, परंतु मां की नाभि-कमल में जो नाव बनती है, वह मुक्ति की नाव कहलाती है। यही वह नाव है जिसमें नौ महीने तक शरीर का निर्माण होता है।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया, कि जिस प्रकार पानी धरती पर गिरकर पौधे और फिर वृक्ष में बदलता है, उसी तरह ज्ञान की प्रक्रिया भी है। वृक्ष से लकड़ी बनती है, उससे पटिये और फिर नाव का निर्माण होता है। इसी प्रकार, सद्गुरु के वचन उस भ्रम और अज्ञान को मिटाते हैं, जो संसार में भटकने का कारण बनता है।

उन्होंने आगे कहा, कि जो श्वास में बह रहा है, वही “सुहंग शब्द” है अखंड नाम, जिसमें अमि तत्व प्रवाहित हो रहा है। उसे पहचानो, समझो और अपने जीवन में आत्मसात करो। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान द्वारा दी गई।

Back to top button