श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव होता है कल्याण

श्रीमद भागवत कथा में मेघा शर्मा ने दिए प्रेरणादायी संदेश
बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। जीवन में जाने-अनजाने में प्रतिदिन कई पाप होते हैं। इन पापों का ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एकमात्र मुक्ति पाने का उपाय है। वैराग्य मानव को ज्ञानी बनाता है। वैराग्य में मानव संसार में रहते हुए भी सांसारिक मोहमाया से दूूर रहता है। सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए।
यह विचार यादव धर्मशाला में श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन मेघा शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा, कि कलियुग का स्वर्ण में वास माना गया है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि सोना पहनना ही छोड़ दे। अनैतिक तरीके से कमाया गए धन से खरीदा गया सोना, अन्याय, अत्याचार, चोरी से प्राप्त किए हुए सोना में ही कलियुग का वास होता है। ईमानदारी से कमाए धन से खरीदे गए सोने में तो भगवान का वास होता है।

सुश्री शर्मा ने सोमवार को श्रीमद भागवत कथा में कपिल चरित्र, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंग सुनाए। कथा के मुख्य यजमान सुनील धर्मपत्नी रानी यादव की ओर से भागवत महापुराण की आरती पूजा-अर्चना की गई।
इसी प्रकार कथा में यादव समाज के वरिष्ठ देवकरण यादव, राधेश्याम कामदार, मनोहर यादव, राजेश बज, विष्णु यादव, रोशन यादव, रोहित यादव, मोहन पटेल, राहुल पटेल, रामेश्वर झड़, जगदीश झड़, देवकरण यादव, शिवनाराय यादव, नंदकिशोर यादव, संतोष यादव, विनोद यादव, परसराम यादव, रवि यादव, पंकज यादव, मुकेश यादव, केशव यादव, राजेश यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।




