फादर्स डे विशेष: एक पिता, जो सिर्फ पिता नहीं, एक युगपुरुष थे…

देवास। आज फादर्स डे के अवसर पर हम उन महान आत्माओं को नमन करते हैं जिन्होंने न सिर्फ जीवन दिया, बल्कि जीवन को जीने की राह भी दिखाई। ऐसे ही एक देवतुल्य पिता को सादर नमन, जिनकी प्रेरणा से आज गांव, समाज और पीढ़ियां आगे बढ़ रही हैं।
मेरे पिता स्व. भारतसिंह राजपूत कोई आम पिता नहीं थे। वे संकल्प थे, सेवा थे, और संस्कार थे। उन्होंने गांव में रहकर पढ़ाई की, संघर्षों के बीच शिक्षा के पथ पर कदम बढ़ाए और इंदौर के शासकीय कला वाणिज्य महाविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त कर गांव का नाम रोशन किया।
उनके पास शासकीय नौकरियों के जॉइनिंग लेटर थे, जिन्हें देखकर कोई भी गर्व से भर जाए, लेकिन उन्होंने उन्हें स्वीकार नहीं किया। क्योंकि वे जानते थे कि उनकी असली पहचान गांव के खेतों में है, उस मिट्टी में है जिससे वे जन्मे थे।
उन्होंने दूध क्रांति और श्वेत क्रांति का नया इतिहास गांव में रचा। यह कोई सरकारी योजना नहीं थी, यह एक किसान के बेटे की आत्मा से उपजी सेवा थी। जहां लोग ऊंचे ओहदों और शहरों की रौशनी में खो जाते हैं, वहीं वे गांव की धूल में अपनी चमक तलाशते रहे।
वे हर समय गरीबों के साथ खड़े रहे- चाहे किसी किसान के पास बीज न हो, या खेत की बुवाई के लिए पैसे न हों, वे मदद के लिए सबसे पहले खड़े मिलते थे।
गांव में कोई संकट आता, तो लोग सरपंच या विधायक के पास नहीं जाते थे। वे सीधे “पापा” को बुलाते थे। क्योंकि उन्हें पता था, कि ये इंसान सिर्फ मदद नहीं करता, दिल से सेवा करता है।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो समझ आता है कि उन्होंने जो बीज सेवा के बोए थे, वही आज मुझे फल के रूप में मिले हैं। उनकी छाया, उनका आशीर्वाद, और उनका संकल्प मेरे साथ है। उन्होंने कभी किसी मंच पर भाषण नहीं दिए, लेकिन उनका जीवन स्वयं एक जीवित उदाहरण था।
आज जब मैं फादर्स डे पर उन्हें याद करता हूं, तो मेरी आंखें नम हैं, लेकिन हृदय गर्व से भरा है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे उनका पुत्र होने का सौभाग्य मिला। मैं उनके पदचिन्हों पर चलकर, उसी भाव से, उसी संकल्प से समाज और गरीबों की सेवा करता रहूंगा। यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पिताजी, आपको नमन…
आपका आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।
आपके मार्ग पर चलना ही मेरा जीवन लक्ष्य है।
जय सेवा, जय संस्कार, जय पितृभक्ति।





