
एक महीने के उपचार के बाद सेहत में हो रहा लगातार सुधार
भोपाल। मध्य प्रदेश के खिवनी अभ्यारण का चर्चित बाघ ‘युवराज’ इन दिनों अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। टेरिटरी पर कब्जे को लेकर हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल होने के बाद वन विभाग ने उसे कठिन परिस्थितियों में रेस्क्यू कर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल पहुंचाया।
यहां विशेषज्ञों की निगरानी और लगातार उपचार के चलते करीब एक महीने बाद उसकी हालत में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। युवराज की यह संघर्षपूर्ण कहानी वन्यजीव संरक्षण और वन विभाग की तत्परता की मिसाल बन गई है।
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युवराज बाघ का जन्म लगभग एक दशक पूर्व खिवनी अभ्यारण में हुआ था। जन्म के दो वर्ष बाद से ही वह लगातार पर्यटन क्षेत्र में पर्यटकों का आकर्षण बना रहा। वयस्क होने पर वह राधा और मीरा नामक बाघिनों के साथ रहा तथा खिवनी अभ्यारण में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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जून के तीसरे सप्ताह में उसकी टेरिटरी में एक युवा बाघ के आने से दोनों के बीच संघर्ष हुआ। इस लड़ाई में युवराज गंभीर रूप से घायल हो गया और चलने-फिरने में असमर्थ हो गया। उसकी स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने 27 जून को विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल की रेस्क्यू टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उसे सुरक्षित पकड़कर वन विहार पहुंचाया।
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रेस्क्यू के छह दिन बाद बाघ को बेहोश कर उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण और एक्स-रे किया गया। जांच में सामने आया कि उसके अगले दोनों पैरों के पंजों में फ्रैक्चर है, जबकि अगले दोनों पैरों और पिछले बाएं पैर में गहरे घाव हैं। पिछले बाएं पैर का घाव अधिक गंभीर होने के कारण छह टांके लगाए गए। इसके बाद से विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका लगातार उपचार किया जा रहा है।

करीब एक महीने के इलाज के बाद युवराज के स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। वन विभाग उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और उम्मीद जताई जा रही है कि वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकेगा।




