शिक्षा

कुर्सी बदली, जिम्मेदारी बढ़ी… लेकिन बच्चों के बीच शिक्षक राजीव सूर्यवंशी आज भी वही

शिक्षक दिवस पर प्रेरक कहानी; सीमित संसाधनों से शुरू हुआ सफर जिला शिक्षा अधिकारी के पद तक पहुंचा

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देवास। कभी बच्चों को कंप्यूटर की शुरुआती शिक्षा देने वाले शिक्षक और आज देवास के जिला शिक्षा अधिकारी राजीव सूर्यवंशी।

शिक्षकीय दायित्वों से शुरू हुआ उनका सफर लगातार नई जिम्मेदारियों तक पहुंचा, लेकिन शिक्षक के रूप में बच्चों के बीच रहने और उन्हें बेहतर शिक्षा देने का जुनून आज भी कायम है। सीमित संसाधनों के बीच शिक्षण कार्य शुरू करने वाले सूर्यवंशी ने अपनी मेहनत, समय की पाबंदी और टीमवर्क के जरिए शिक्षा विभाग में अलग पहचान बनाई है। शिक्षक दिवस पर उनकी यह यात्रा उन शिक्षकों के लिए प्रेरक है, जो अपनी जिम्मेदारी को केवल नौकरी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ने का माध्यम मानते हैं।

बच्चों को किताबों के साथ कंप्यूटर से जोड़ने की पहल

शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारायण विद्या मंदिर क्रमांक-2 देवास से व्यावसायिक वोकेशनल शिक्षक के रूप में शिक्षकीय सफर शुरू करने वाले राजीव सूर्यवंशी ने उस दौर में विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया, जब स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा इतनी सहज नहीं थी। व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगार की संभावनाओं से जोड़ना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

इसके बाद व्याख्याता के रूप में देवास जिले के विभिन्न हायर सेकेंडरी विद्यालयों में सेवाएं देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। टोंकखुर्द विकासखंड के नांदेल, कन्या उमावि टोंकखुर्द, आगरोद उमावि, बगाना और शिप्रा सहित विभिन्न विद्यालयों में सेवाएं देते हुए उनका शिक्षकीय अनुभव लगातार व्यापक होता गया।

जिम्मेदारी बढ़ी तो काम का दायरा भी बढ़ता गया

शिक्षकीय और शैक्षणिक कार्यों में सक्रियता के चलते उन्हें विभाग में आगे भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, जिला परियोजना समन्वयक और वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में वे देवास जिले की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

अधीनस्थ शिक्षकों के अनुसार उनकी कार्यक्षमता और काम पूरा करने की शैली उन्हें अलग बनाती है। किसी कार्य को लंबित रखने की बजाय उसे समय सीमा में पूरा करने पर उनका विशेष जोर रहता है। आवश्यकता पड़ने पर वे देर तक कार्यालय में बैठकर विभागीय कार्यों को पूरा करते हैं।

अधिकारी बने, लेकिन बच्चों के बीच शिक्षक आज भी वही

जिला शिक्षा अधिकारी का पद संभालने के बाद भी राजीव सूर्यवंशी की कार्यशैली में शिक्षक का भाव कम नहीं हुआ। स्कूलों के निरीक्षण के दौरान वे व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ बच्चों से संवाद करना, उन्हें पढ़ाई के तरीके बताना और ज्ञानवर्धक बातें साझा करना नहीं भूलते।

आज भी उनके स्तर से विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यही वजह है कि उनके साथ काम करने वाले शिक्षक उन्हें केवल अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे शिक्षाविद् के रूप में देखते हैं, जो प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच भी विद्यार्थी को केंद्र में रखते हैं।

‘अकेले नहीं, पूरी टीम के साथ काम’—यही कार्यशैली की पहचान

राजीव सूर्यवंशी की कार्यशैली में टीमवर्क को खास महत्व दिया जाता है। वे शिक्षकों को लगातार बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं और शैक्षणिक कार्यों को पूरा करने के लिए उनमें इच्छाशक्ति पैदा करने पर जोर देते हैं।

शिक्षकों के साथ उनका व्यवहार भी उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण पक्ष है। वे अधीनस्थ शिक्षकों को परिवार के सदस्य की तरह मानते हुए आवश्यकता के समय उनके सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। समाज के हर वर्ग तक शिक्षा की पहुंच बने और विद्यार्थी शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ें, इस सोच को वे प्राथमिकता देते हैं।

‘पढ़ाई ऐसी हो, जो आगे रोजगार का रास्ता भी खोले’

सूर्यवंशी की सोच में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं है। वे ऐसी शिक्षा पर जोर देते हैं, जो विद्यार्थियों को आगे चलकर रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ले जाए। इसी सोच के कारण व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा से उनका जुड़ाव उनके शिक्षकीय सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

आज उनके पढ़ाए विद्यार्थी भी संभाल रहे जिम्मेदारियां

एक शिक्षक के लिए इससे बड़ी उपलब्धि और क्या होगी कि उसके पढ़ाए विद्यार्थी आगे बढ़कर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। राजीव सूर्यवंशी से शिक्षा प्राप्त करने वाले कई विद्यार्थी आज सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं। कई विद्यार्थी जनप्रतिनिधि बनकर समाज सेवा में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

इन विद्यार्थियों की सफलता उनके लंबे शिक्षकीय सफर की उन उपलब्धियों में शामिल है, जिसका उल्लेख किसी पद या पुरस्कार से अधिक महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

पद बदल सकता है, शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं- 

राजीव सूर्यवंशी का सफर बताता है कि एक शिक्षक की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके काम और विद्यार्थियों के प्रति उसकी सोच से बनती है। शिक्षक से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचने के बाद भी बच्चों के बीच जाकर उनसे संवाद करने की उनकी आदत यह बताती है कि पद ने उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई है, शिक्षक होने का भाव नहीं बदला।

मेहनत, समय की पाबंदी, टीमवर्क और छात्र हित को प्राथमिकता देने वाली उनकी कार्यशैली आज शिक्षा विभाग में काम कर रहे अनेक शिक्षकों के लिए प्रेरणा का विषय है। शिक्षक दिवस पर ऐसी ही यात्राएं याद दिलाती हैं कि एक समर्पित शिक्षक की पहुंच केवल एक कक्षा तक नहीं होती, वह आगे चलकर पूरे शिक्षा तंत्र की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

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