खेत-खलियान

गुलाबी ठंड की दस्तक, रबी फसलों की तैयारी में जुटे किसान

कम बारिश से जलस्रोत आधे-अधूरे भरे, आगामी दिनों में सिंचाई की चुनौती बढ़ने की आशंका

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बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। मानसून की विदाई के साथ ही मौसम में बदलाव का असर दिखाई देने लगा है। सुबह-शाम गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है और खेतों में ओस गिरने लगी है। मौसम में आ रहे इस बदलाव के बीच किसान रबी सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं।

कहीं आलू की फसल लगाने का काम शुरू हो गया है, तो कहीं किसान लहसुन, गेहूं और चने की बोवनी के लिए खेत तैयार कर रहे हैं। हालांकि, इस बार औसत से कम बारिश होने के कारण किसानों के सामने आगामी दिनों में फसलों की सिंचाई की चिंता भी खड़ी हो सकती है।

सुबह-शाम ठंडक, दिन में गर्मी का असर-
क्षेत्र में पिछले चार दिनों से खेतों में ओस दिखाई देने लगी है। सुबह और शाम के समय ठंडक बढ़ने से मौसम में गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है। सुबह घूमने निकलने वाले लोगों के साथ दूध और अखबार वितरण करने वालों को भी हल्की ठंड महसूस हो रही है। वहीं, दोपहर में गर्मी का असर बना हुआ है। दिन और रात के तापमान में अंतर के बीच मौसम धीरे-धीरे सर्दी की ओर बढ़ रहा है।

क्षेत्र में 22 जून से सितंबर के दूसरे सप्ताह तक बारिश का दौर चला, लेकिन इस बार पर्याप्त वर्षा नहीं होने से जलस्रोत पूरी तरह नहीं भर पाए। नदी-नालों के साथ कुएं, हैंडपंप, ट्यूबवेल और तालाबों में भी पानी की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। इसका असर आगामी रबी सीजन में देखने को मिल सकता है।

आलू की बोवनी शुरू, गेहूं-चना के लिए खेत तैयार-
मौसम में बदलाव के साथ ही किसानों ने रबी फसलों की तैयारी तेज कर दी है। क्षेत्र में आलू की फसल लगाने का काम शुरू हो गया है, जबकि लहसुन, गेहूं और चने की खेती के लिए किसान खेत तैयार करने में जुटे हैं। तापमान में गिरावट के साथ आगामी दिनों में बोवनी का काम और गति पकड़ सकता है।

रबी सीजन किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान फसलों की शुरुआती बढ़वार से लेकर दाने बनने तक पानी की जरूरत रहती है। ऐसे में समय पर बोवनी के साथ सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना भी जरूरी है।

कम बारिश से सिंचाई की चिंता-
इस बार बारिश की कमी के कारण जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में जब गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों की सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी, तब किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वे किसान, जो कुओं और ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए जलस्तर और उपलब्ध पानी महत्वपूर्ण रहेगा।

यदि सर्दी के मौसम में बारिश नहीं होती और जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता सीमित रहती है, तो सिंचाई के लिए समस्या आएगी। इससे फसल की लागत और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका रहेगी। ऐसे में इस बार रबी सीजन में किसानों की नजर मौसम के साथ-साथ खेतों में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी पर भी रहेगी।

ठंड बढ़ने के साथ तेज होगी खेती-
सुबह-शाम बढ़ती ठंड रबी सीजन की शुरुआत का संकेत दे रही है। आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट के साथ खेतों में बोवनी का काम तेज होने की उम्मीद है।

हालांकि, इस बार अच्छी फसल की उम्मीद केवल मौसम अनुकूल रहने पर ही निर्भर नहीं करेगी, बल्कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता भी अहम भूमिका निभाएगी। किसानों के सामने अब रबी फसलों की तैयारी के साथ कम बारिश से पैदा हुई पानी की चुनौती से निपटने की भी जिम्मेदारी है।

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