खेत-खलियान

Pumpkin Farming: बारिश की फसलों में सबसे फायदे का सौदा बना कद्दू

कम लागत, भरपूर उत्पादन..., 12-15 रुपए किलो मिल रहा भाव, 30 किलो तक के कद्दू निकल रहे खेतों से

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बेहरी। खरीफ सीजन में बेहरी क्षेत्र के किसानों के लिए कद्दू की खेती उम्मीद से कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है। कम लागत, कम देखभाल और बेहतर उत्पादन के कारण यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन गई है।

क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक किसानों ने इस वर्ष बड़े पैमाने पर कद्दू की खेती की है और अब उन्हें मंडी में अच्छे दाम मिलने से चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि किसानों का कहना है कि यदि क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा मिल जाए तो उनकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है।

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बेहरी क्षेत्र के खेतों में इस समय 10 से 40 किलो तक वजन वाले कद्दू तैयार हो रहे हैं। यहां से प्रतिदिन करीब 20 से 25 क्विंटल कद्दू स्थानीय मंडियों तक पहुंच रहा है। वर्तमान में मंडी में कद्दू 12 से 15 रुपए प्रति किलो यानी करीब 1500 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है।

कम खर्च की फसल, मुनाफा दूसरी फसलों से ज्यादा-
किसान शैलेंद्र सिंह शक्तावत, आशीष पाटीदार, सोनू परमार और हरि पाटीदार का कहना है कि इस बार कद्दू की खेती फायदे का सौदा साबित हुई है। उनका कहना है कि इस फसल में लागत बेहद कम आती है और यदि बाजार में उचित भाव मिल जाए तो बारिश के मौसम में होने वाली अधिकांश फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिलता है। यही कारण है कि अब क्षेत्र के कई किसान कद्दू की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

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नहीं मिल पाता बढ़े हुए भाव का लाभ-
किसानों की खुशी के बीच सबसे बड़ी चिंता भंडारण की सुविधा का अभाव है। किसान गब्बूलाल पाटीदार और राजकुमार पाटीदार बताते हैं कि कद्दू की कीमत कुछ समय बाद और बढ़ जाती है। यदि फसल को सुरक्षित रख सकें तो ज्यादा दाम मिल सकते हैं, लेकिन क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज नहीं होने से मजबूरी में तुरंत बिक्री करनी पड़ती है।

उन्होंने बताया कि अन्य जिलों में किसान कोल्ड स्टोरेज में फसल सुरक्षित रखकर भाव बढ़ने का इंतजार करते हैं और बेहतर मुनाफा कमाते हैं। बेहरी क्षेत्र के किसान भी लंबे समय से ऐसी सुविधा की मांग कर रहे हैं।

एक माह तक सुरक्षित रहता है कद्दू-
किसानों के अनुसार कद्दू सामान्य परिस्थितियों में लगभग एक माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सावन और नवरात्रि के दौरान इसकी मांग बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना रहती है। यदि वैज्ञानिक भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो किसान सही समय पर बिक्री कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

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100 क्विंटल तक उत्पादन-
किसान गब्बूलाल पाटीदार बताते हैं कि कद्दू की खेती बेहद किफायती है। उन्होंने बताया कि पौधों की रोपाई 10 से 12 फीट की दूरी पर की जाती है और फसल 90 से 115 दिन में तैयार हो जाती है। लगभग 500 ग्राम बीज से एक बीघे से अधिक क्षेत्र में बुवाई हो जाती है, जबकि 100 ग्राम बीज से 70 से 80 बेल तैयार होती हैं।

उनका कहना है कि इतनी बेलों से 100 क्विंटल से अधिक कद्दू का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

फसल में निंदाई-गुड़ाई की जरूरत भी बहुत कम रहती है और खेत में निकलने वाली खरपतवार पशुओं के चारे के रूप में उपयोग हो जाती है। इससे खेती की लागत और कम हो जाती है तथा पशुपालकों को भी लाभ मिलता है।

जरूरत के अनुसार होती है तुड़ाई-
बेहरी क्षेत्र में कद्दू का वजन सामान्यतः 5 से 30 किलो तक है, जबकि कई खेतों में 40 किलो तक के कद्दू भी निकल रहे हैं। किसान आवश्यकता के अनुसार फल की तुड़ाई कर बाजार में भेजते हैं, जिससे फसल बाजार की मांग के अनुसार बिक्री संभव हो पाती है।

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किसानों की मांग-
बेहरी क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध कराने, वैज्ञानिक भंडारण की जानकारी देने तथा कद्दू जैसी लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने की मांग की है। किसानों का मानना है कि यदि यह सुविधा मिल जाए तो क्षेत्र की खेती और किसानों की आय दोनों नई ऊंचाई तक पहुंच सकती है।

 

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