अमरता का संदेश देने वाली वाणी ही होती है अजर-अमर
गुरु-शिष्य संवाद एवं गुरुवाणी पाठ में बोले सद्गुरु मंगलनाम साहेब

देवास। मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसका वचन और शब्द हैं। शब्द केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विश्वास और मर्यादा की नींव भी हैं।
इसलिए व्यक्ति के प्राण भले ही चले जाएं, लेकिन दिया गया वचन कभी नहीं टूटना चाहिए। यही कारण है कि भगवान श्रीराम ने वनवास स्वीकार किया और अपने वचन की मर्यादा को सर्वोच्च स्थान दिया।
यह विचार सद्गुरु मंगलनाम साहेब ने सतगुरु कबीर प्रार्थना स्थली द्वारा आयोजित गुरु-शिष्य संवाद एवं गुरुवाणी पाठ के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीव जब माता के गर्भ में प्रवेश करता है, तभी से उसके जीवन की यात्रा प्रारंभ होती है। पंचतत्व और तीन गुणों के संयोग से मानव शरीर का निर्माण होता है। इसी आध्यात्मिक रहस्य को गुरु के ज्ञान और संवाद के माध्यम से समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राण पुरुष स्वयं विदेही हैं, जबकि शरीर सदेही है। सृष्टि की रचना और जीवन का रहस्य आध्यात्मिक दृष्टि से समझने पर ही स्पष्ट होता है।
सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने कहा कि नर और नारी दोनों सृष्टि के पूरक स्वरूप हैं। दोनों के संतुलन से ही सृजन और जीवन का विस्तार संभव होता है। माता-पिता के माध्यम से ही मानव शरीर का निर्माण होता है और यही जीवन की शुरुआत का आधार है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चंदन को पत्थर पर घिसने से उसकी सुगंध प्रकट होती है, उसी प्रकार जीवन में संघर्ष और साधना से व्यक्ति का वास्तविक व्यक्तित्व निखरता है। बचपन और युवावस्था क्षणभंगुर हैं, लेकिन सद्गुरु का ज्ञान और शब्द शाश्वत होते हैं।
‘अमरता का संदेश देने वाली वाणी ही अमर होती है’
अपने प्रवचन में सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने कहा कि “शब्द स्वयं अजर-अमर हैं, लेकिन वाणी तभी अजर-अमर बनती है, जब उसमें अमरता, सत्य और मानव कल्याण का संदेश समाहित हो।” उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से जीवन में सत्य, वचनबद्धता और सदाचार को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में साध-संगत ने सद्गुरु मंगल नाम साहेब को नारियल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसकी जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।
खबर एक नजर में:
🔺गुरु-शिष्य संवाद एवं गुरुवाणी पाठ का आयोजन।
🔺सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने वचन, शब्द और सत्य के महत्व पर दिया संदेश।
🔺श्रीराम के वनवास का उदाहरण देकर निभाए गए वचन की महत्ता बताई।
🔺कहा— “वाणी तभी अजर-अमर होती है, जब उसमें अमरता और मानव कल्याण का संदेश हो।”
🔺साध-संगत ने नारियल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।




