धर्म-अध्यात्म

राजयोग से मिलेगा तनावमुक्त जीवन का मार्ग, आत्मा-परमात्मा के मिलन का नाम है योग: प्रेमलता दीदी

Share

 

ब्रह्माकुमारी केंद्र में विशेष आयोजन, आध्यात्मिक और शारीरिक योग का बताया महत्व

देवास। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली एक दिव्य आध्यात्मिक यात्रा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, चिंता और असंतुलन से जूझ रहे लोगों के लिए योग एक प्रभावी समाधान है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कालानी बाग सेंटर में आयोजित विशेष योग कार्यक्रम में योग का महत्व बताया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी ने कहा कि योग का वास्तविक अर्थ आत्मा और परमात्मा का मिलन है। वर्तमान समय में अधिकांश लोग शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं, लेकिन मानसिक शांति और आत्मिक सुख की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। योग व्यक्ति को केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं बनाता, बल्कि उसके मन, बुद्धि और संस्कारों को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि आज तनाव, अवसाद, क्रोध और प्रतिस्पर्धा की भावना समाज में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में राजयोग व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और स्वयं को समझने का अवसर देता है। राजयोग के माध्यम से व्यक्ति अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत कर सकता है तथा जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना सहजता और धैर्य के साथ कर सकता है।

प्रेमलता दीदी ने कहा कि राजयोग ईश्वर से जुड़ने की एक सहज और वैज्ञानिक पद्धति है। इसमें आंखें बंद करने या किसी विशेष स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति खुले वातावरण में भी स्वयं को एक शांत, पवित्र और शक्तिशाली आत्मा के रूप में अनुभव करते हुए परमपिता परमात्मा से मानसिक रूप से जुड़ सकता है। यही जुड़ाव जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करता है।

उन्होंने बताया कि जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ और प्रसन्न रखने के लिए श्रेष्ठ विचारों का सेवन जरूरी है। नकारात्मक सोच व्यक्ति की ऊर्जा को कमजोर करती है, जबकि सकारात्मक विचार जीवन में उत्साह, उमंग और आत्मबल का निर्माण करते हैं। राजयोग के नियमित अभ्यास से सहनशीलता, प्रेम, करुणा, क्षमा और सहयोग जैसे गुण स्वतः विकसित होने लगते हैं।

दीदी ने कहा कि जब व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है तो उसका प्रभाव परिवार, समाज और कार्यस्थल पर भी दिखाई देता है। योग केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि विश्व शांति की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने आध्यात्मिक योग के साथ-साथ शारीरिक योग के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों का संतुलन जीवन को संपूर्ण बनाता है। शारीरिक योग शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखता है, जबकि आध्यात्मिक योग मन और आत्मा को शक्ति प्रदान करता है। जब दोनों का समन्वय होता है, तब व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ, संतुलित और सफल जीवन जी सकता है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं योग प्रशिक्षक अर्चना शर्मा के मार्गदर्शन में उपस्थित भाई-बहनों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। उन्होंने योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान योग के महत्व, उसके वैज्ञानिक पहलुओं तथा दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इस अवसर पर संस्था से जुड़े भाई-बहन ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी, अतपुलश्री दीदी, हेमा वर्मा बहन, सफला बहन, रत्नप्रभा बहन, हिमानी बहन, रमा बहन, मंजू बहन, पुष्पा बहन, विवेक भाई, राम भाई, सुनील भाई, पूरण भाई, चिराग भाई आदि ने योग प्राणायाम कर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया।

 

Back to top button