धर्म-अध्यात्म

प्रेम, श्रद्धा और भाव से दिया गया सूखा भोजन भी छप्पन भोग से श्रेष्ठ है

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श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति पर आचार्य कमल नयन शास्त्री ने दिया प्रेरक संदेश

देवास। जो प्रेम, श्रद्धा और निष्कलंक भाव से दिया गया सूखा भोजन है, वह छप्पन भोग से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि भगवान को वैभव नहीं बल्कि भक्त का भाव प्रिय होता है; सच्चा आनंद धन, पद या ऐश्वर्य में नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और निस्वार्थ प्रेम में निहित है, और जब मनुष्य अपने भीतर से स्वार्थ, अहंकार और लालच का त्याग कर देता है तभी उसके जीवन में वास्तविक शांति और दिव्यता का अनुभव होता है।

यह विचार बुधवार को जय बाल हनुमान मंदिर, शिव शक्ति नगर (उज्जैन रोड) देवास में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति पर कथा व्यास आचार्य कमल नयन शास्त्री ने व्यक्त किए।

पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित इस कथा के अंतिम दिवस पर व्यासपीठ की पूजा एवं हवन सभी यजमानों द्वारा विधिविधान से संपन्न किया गया। कथा व्यास आचार्य कमल नयन शास्त्री ने सुदामा चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा सुख भोग-विलास, धन-दौलत या वैभव में नहीं, बल्कि प्रेम, श्रद्धा, सेवा और निष्कलंक समर्पण में निहित है।👉 श्रीमद् भागवत कथा से ही मिलता है सच्चे सत्संग का मार्ग

उन्होंने आगे कहा कि सुदामा चरित्र हमें यह संदेश देता है कि मित्रता और संबंधों का आधार भौतिक संपन्नता नहीं बल्कि हृदय का निर्मल प्रेम होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा की दरिद्रता नहीं देखी, बल्कि उनके भाव और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया। यही कारण है कि सूखे चावल का वह प्रसाद भी दिव्य बन गया, जिसे भगवान ने अत्यंत प्रेम से ग्रहण किया।

आचार्य शास्त्री ने बताया कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के द्वार पहुंचे, तब श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी ने स्वयं उनके चरण प्रक्षालन कर उन्हें सम्मानपूर्वक सिंहासन पर बैठाया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। इसके बाद जब सुदामा द्वारा लाई गई पोटली से चावल निकले तो भगवान ने उसे बड़े भाव से ग्रहण किया। रुक्मिणी जी के आग्रह पर वह प्रसाद सभी ने मिलकर ग्रहण किया, जिससे यह संदेश मिलता है कि प्रेम से दिया गया अल्पाहार भी सर्वोच्च भोग से अधिक मूल्यवान होता है।

आचार्य शास्त्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे यहां से यह संकल्प लेकर जाएं कि अपने जीवन में प्रेम, करुणा, सेवा और समर्पण को अपनाएं तथा परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखें। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में अहंकार, स्वार्थ और लालच को त्याग दे तो उसका जीवन स्वयं एक साधना बन जाता है। 👉 शोक, मोह और चिंता से मुक्ति का मार्ग है हरि भक्ति- आचार्य कमल नयन शास्त्री

कथा में राजा परीक्षित की मोक्ष कथा का भी वर्णन किया गया। इसके साथ ही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ।  👉 आत्मा और परमात्मा का मिलन ही गोपी संवाद का वास्तविक स्वरूप

जय बाल हनुमान मंदिर परिवार की ओर से सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन के समापन पर “राधे-राधे” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

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