आत्मानुभूति से मिट जाता है जीव और ब्रह्म का भेद- आचार्य गंभीरानंद अवधूत

देवास। आत्मानुभूति के माध्यम से जीव और ब्रह्म के बीच का भेद समाप्त हो जाता है। आध्यात्मिक साधना का उद्देश्य भी इसी अनुभूति को प्राप्त करना है।
यह विचार क्षेत्रीय आध्यात्मिक सेमिनार में मुख्य प्रशिक्षक आचार्य गंभीरानंद अवधूत ने व्यक्त किए। सेमिनार में ग्वालियर, उज्जैन, भिंड, मुरैना, लहार, शिवपुरी, दतिया, गुना और देवास सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में साधक एवं श्रद्धालु शामिल हुए।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए आचार्य सुभद्रानंद अवधूत ने बताया कि सेमिनार में सामाजिक, आर्थिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्राउट (PROUT) दर्शन के साथ-साथ आध्यात्मिक दर्शन, भक्ति, रूप एवं रूपातीत जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सेमिनार के दौरान प्रतिदिन प्रभात फेरी, सामूहिक योग, ध्यान एवं विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया गया। सेवा धर्म मिशन की ओर से आचार्य सुभद्रानंद अवधूत एवं उनकी टीम ने ‘बाबा नाम केवलम’ नाम संकीर्तन के साथ कोशिकी एवं तांडव नृत्य का आयोजन कराया। इसके अलावा नगर में भव्य कीर्तन शोभायात्रा भी निकाली गई।

कार्यक्रम में शिवपुरी स्कूल की प्राचार्य दीदी अवधूतिका आनंद सदाशिव आचार्य के निर्देशन में विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार भी वितरित किए गए। महिला कल्याण केंद्र की प्रभारी दीदी अवधूतिका आनंद प्रभा आचार्य ने महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य एवं संतुलित जीवनशैली के बारे में उपयोगी जानकारी दी।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अशोक शर्मा, मनोज जैन, मनीष गर्ग, निष्काम गर्ग, अभिषेक, जयप्रकाश शर्मा सहित कई कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा। वहीं शिवपुरी के स्थानीय भुक्ति प्रमुख नारायण दास गर्ग एवं उनकी आयोजन समिति ने व्यवस्थाओं का संचालन किया। कार्यक्रम की जानकारी हेमेंद्र निगम ‘काकू’ ने दी।




