साधु वही जो साधकर पूर्णता को प्राप्त करें- मंगलनाम साहेब

देवास। गुरुवाणी पाठ एवं गुरु-शिष्य संवाद कार्यक्रम में सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने साधना और आत्मज्ञान पर गहन विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सच्चा साधु वही है, जो साधना के माध्यम से पूर्णता को प्राप्त कर लेता है।
उन्होंने समझाया कि साधु का धर्म साधना है। जीवन में आने वाली हर मुसीबत को साधकर पार करना ही सच्ची साधना है। व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचने और सुख प्राप्त करने के लिए साधना का मार्ग खोजना चाहिए।
सद्गुरु ने कहा कि मनुष्य की धारणा, ध्यान और समाधि इस बात पर निर्भर करती है कि वह वास्तव में क्या चाहता है। जो व्यक्ति सत्य की खोज में रहता है, वही सच्चा साधक कहलाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वेशभूषा, दाढ़ी या जटा बढ़ाने से कोई साधु या ज्ञानी नहीं बनता।
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वहीं, उन्होंने ज्ञान और जिज्ञासा के अंतर को भी समझाया। उनके अनुसार जिज्ञासु ही परमात्मा की खोज करता है, जबकि ज्ञानी होने का अहंकार व्यक्ति को सत्य से दूर कर देता है। जब मनुष्य सच्चे अर्थों में जान जाता है, तब उसे परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का बोध होता है।
इसके अलावा, सद्गुरु ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार आंख, प्रकाश और वस्तु तीनों के होने पर ही हम देख पाते हैं, उसी तरह परमात्मा की अनुभूति भी सही मार्ग और ज्ञान से ही संभव है। उन्होंने कहा कि अज्ञान अंधकार की तरह है, जिसकी कोई वास्तविक जड़ नहीं होती।
कार्यक्रम के अंत में साध संगत के सेवकों ईश्वरलाल, जीवा साहेब और मिर्ची बाबा सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सद्गुरु मंगल नाम साहेब का नारियल एवं पुष्पमाला से स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।




