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नेशनल लोक अदालत में 876 लंबित व 470 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण, करोड़ों की राशि पर हुआ समझौता

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कुटुंब न्यायालय ने बनाया रिकॉर्ड, एक ही बैठक में 68 पारिवारिक प्रकरणों का निराकरण

देवास। वर्ष की पहली नेशनल लोक अदालत में बड़ी सफलता मिली। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार आयोजित इस लोक अदालत में जिलेभर की 34 न्यायिक खंडपीठों ने मिलकर 876 लंबित तथा 470 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया। विभिन्न मामलों में कुल 12 करोड़ 63 लाख 40 हजार 174 रुपए के अवार्ड पारित किए गए, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को त्वरित न्याय का लाभ मिला।

 

प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास अजय प्रकाश मिश्र के मार्गदर्शन में शनिवार को जिले के समस्त न्यायालयों में वृहद स्तर पर इस वर्ष की प्रथम ’नेशनल लोक अदालत’ का आयोजन किया गया।

विशेष न्यायाधीश एवं लोक अदालत प्रभारी विकास शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, कि लोक अदालत में प्रकरणों का निराकरण कराने पर पक्षकारों को समय एवं धन की बचत होती है। साथ ही उन्होंने न्यायिक अधिकारीगण और अधिवक्तागण को अधिक से अधिक प्रकरणों में राजीनामा कराने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर जितेन्द्र कुशवाह कुटुम्ब न्यायालय ने कहा कि लोक अदालत न्याय पाने का सबसे आसान एवं उत्तम माध्यम है। इसका लाभ उठाएं। उन्होंने अधिवक्तागण से कहा कि वे दुगने उत्साह से लोक अदालत में भाग लें।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवार न्यायालय, देवास ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। परिवार न्यायालय के न्यायाधीश जितेन्द्र कुशवाह ने एकल बैठक में कुल 68 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। यह संख्या परिवार न्यायालय, देवास के इतिहास में किसी एक लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों की सर्वाधिक संख्या है। उल्लेखनीय है कि पारिवारिक विवादों का निराकरण अत्यंत संवेदनशील एवं जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें पक्षकारों के मध्य सहमति बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे में एक ही दिन में 68 परिवारों को न्याय एवं राहत प्रदान किया जाना न केवल श्री कुशवाह की न्यायिक कुशलता एवं अथक परिश्रम का परिचायक है, अपितु उन सभी परिवारों के लिए भी एक नई शुरुआत है जो लंबे समय से विवाद की स्थिति में थे।

नेशनल लोक अदालत में सिविल, आपराधिक, विद्युत अधिनियम, एनआईएक्ट, चैक बाउन्स, श्रम मामले, मोटर दुर्घटना दावा, बीएसएनएल आदि विषयक प्रकरणों के निराकरण हेतु जिला मुख्यालय देवास एवं तहसील स्तर पर सोनकच्छ, कन्नौद, खातेगांव, टोंकखुर्द एवं बागली में 34 न्यायिक खंडपीठों का गठन किया गया। विकास शर्मा, विशेष न्यायाधीश एवं रोहित श्रीवास्तव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विद्युत कंपनी, नगर निगम, बैंक, बीएसएनएल, बीमा कंपनी के स्टॉल पर जाकर तथा खंडपीठों का भ्रमण कर समस्त संबंधित अधिकारीगण को लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में प्रकरण के निराकरण हेतु प्रेरित किया गया। राजीनामा करने वाले पक्षकारगण को स्मृति स्वरूप फलदार और फूलों के पौधे भेंट किए गए एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित किया गया।

शुभारंभ कार्यक्रम में जितेंद्र सिंह कुशवाह प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, उमाशंकर अग्रवाल प्रथम जिला न्यायाधीश, अभिषेक गौड़ पंचम जिला न्यायाधीश, उत्तम कुमार डारवी द्वितीय जिला न्यायाधीश, राजेन्द्र कुमार पाटीदार तृतीय जिला न्यायाधीश, प्रसन्न सिंह बहरावत चतुर्थ जिला न्यायाधीश, डॉ. रविकांत सोलंकी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, भारत सिंह कनेल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रोहित श्रीवास्तव सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अन्य न्यायाधीशगण नीलेन्द्र कुमार तिवारी, साक्षी कपूर, दीक्षा मौर्य, कुंवर युवराज सिंह, निकिता वार्ष्णेय पांडे, प्रियांशु पांडे, रश्मि अभिजीत मरावी, किरण सिंह, सौरभ जैन, सुश्री चंद्रा पवार, सुभाष चौधरी जिला विधिक सहायता अधिकारी, अशोक वर्मा, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ, अतुल पंड्या सचिव अधिवक्ता संघ, आरती खेडेकर, उपायुक्त नगर निगम, विद्युत कंपनी एवं बैंक के अधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस काउंसेल स्टॉफ, लोक अभियोजन अधिकारीगण, अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं पक्षकारगण उपस्थित रहे।

नेशनल लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों की जानकारी- इतिहास रचते हुए देवास जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 876 लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ है। संपूर्ण जिले में गठित 34 न्यायिक खंडपीठों में न्यायालयों के लंबित प्रकरणों में आपराधिक प्रकरण 264, मोटर दुुर्घटना के 58, चैक बाउन्स 171, फैमेली मेटर्स 55, विद्युत के 156, श्रम के 11, विविध के 130, सिविल के 26, कुल 876 प्रकरण निराकृत हुए जिसमें राशि 12 करोड़ 63 लाख 40 हजार 174 रुपए का अवार्ड पारित किया गया, जिसमें 2086 लोग लाभांवित हुए। निराकृत 58 क्लेम प्रकरणों में राशि 6 करोड़ 63 लाख 77 हजार रुपए के अवार्ड आपसी समझौते के आधार पर पारित किए गए। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के 171 प्रकरण निराकृत हुए जिनमें 04 करोड़ 31 लाख 38 हजार 753 रुपए के चैकों की राशि में सेटलमेंट किया गया। 39 लाख 57 हजार 228 रुपए के 26 सिविल प्रकरणों का निराकरण हुआ। 470 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें 69 लाख 24 हजार 107 राशि के अवार्ड पारित किए गए हैं एवं 896 व्यक्ति लाभांवित हुए हैं।

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