धर्म-अध्यात्म

भगवान को जो सच्चे भाव से भजता है उसका बेड़ा पार हो जाता है-  पं. अजय शास्त्री

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कलयुग ए कैसी उलटी गंगा बहा रहा है, माता-पिता को बेटा ठोकर लगा रहा है… की प्रस्तुति पर श्रद्धालु हुए भाव-विभोर 
देवास। कलियुग में कैसी उल्टी गंगा बह रही है। एक श्रवण कुमार था, जिसने अपने माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी, लेकिन आज कलियुग में माता-पिता को अपने ही बेटे ठोकर लगा रहे हैं। बुजुर्गों से वृद्ध आश्रम भरे हैं।
यह विचार रामी गुजराती माली रामकृष्ण मंदिर बड़ा बाजार में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ से पं. अजय शास्त्री सिया वाले ने कथा के तीसरे दिन व्यक्त किए। आगे कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं। भाव से जो भगवान को भजता है, उसका बेड़ा पार हो जाता है। भाव नहीं, तो भक्ति बेकार है। भगवान श्रीकृष्ण जब धराधाम छोड़कर जा रहे थे तो उद्धवजी ने कहा प्रभु! हमें भी अपने साथ ले चलो। भगवान ने कहा, कि उद्धव मैं मेरी सबसे प्यारी वस्तु तुम्हें देता हूं। भगवान में जिन लोगों ने अपना चित्त अर्पित कर दिया, मैं वह कथा आपको अर्पण करता हूं। आगे कहा कि हमने सब छोड़ दिया लेकिन कपट नहीं। ऐसी भक्ति किस काम की जो विकारों से भरी हो। अपने मन में व्याप्त व्यसन, विकारों को छोड़ो। परमात्मा प्रेम के भूखे हैं धन के नहीं। बस उनसे प्रेम करो।
bhagvat katha
इस दौरान पं. शास्त्री ने भक्ति गीत कलियुग ये कैसी उलटी गंगा बहा रहा है, बेटा अपने माता-पिता को ठोकर लग रहा है…  की सुमधुर प्रस्तुति दी तो श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। वामन अवतार की भावपूर्ण व्याख्या की गई। आयोजन समिति रामी गुजराती माली समाज द्वारा व्यासपीठ की पूजा अर्चना कर  आरती की गई। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया
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