धर्म-अध्यात्म

पुत्र की दीर्घायु हेतु माताओं ने किया हल छठ व्रत

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भगवान बलराम के जन्मोत्सव पर श्रद्धा-भक्ति से हुआ पूजन

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। पुत्र की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना के साथ माताओं ने शुक्रवार को हल छठ व्रत श्रद्धा और भक्ति भाव से किया। सुबह से ही महिलाओं में व्रत और पूजन को लेकर उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी जगदीशदास बैरागी व अनसूया बैरागी ने जानकारी दी कि प्रातः 9 बजे से ही महिलाओं की लंबी कतारें हल छठ पूजा के लिए मंदिर और पूजन स्थलों पर लगना शुरू हो गई थीं।

अनाज का परहेज, फलों का सेवन-
मान्यतानुसार हल छठ के दिन हल से जोते गए खेत या उससे उत्पादित अनाज का सेवन नहीं किया जाता। व्रती महिलाओं ने पूरे दिन उपवास रखकर केवल फलों और प्राकृतिक रूप से उपलब्ध वस्तुओं का सेवन किया। किसान परिवारों ने विशेष रूप से बेल में लगने वाले फल-सब्जियों को व्रत में शामिल किया।

हल षष्ठी व्रत के अवसर पर माताओं ने भगवान बलराम और हल षष्ठी की कथा श्रद्धापूर्वक सुनी। नगर ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी महिलाएं एकत्रित होकर भगवान बलराम की पूजा-अर्चना करती रहीं। गोबर से पूजा घर की दीवारों पर छठ माता का चित्र बनाया गया। साथ ही भगवान गणेश और माता गौरी की भी पूजा की गई।

बलराम जन्मोत्सव के रूप में पर्व-
पंडितों ने बताया कि हल छठ पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। बलराम जी को कृषि और हल से विशेष लगाव रहा है, इसलिए इस दिन हल से जोते गए खेतों के अन्न का सेवन वर्जित माना गया है।

क्षेत्र में हुई बारिश ने बढ़ाई रौनक-
पूजन-अर्चना के बीच क्षेत्र में करीब एक घंटे तक हुई तेज वर्षा ने वातावरण को और भी पावन बना दिया। महिलाएं भीगते हुए भी पूरे उत्साह से पूजन-अर्चना में जुटी रहीं।

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