ऋषि पंचमी पर माहेश्वरी समाज में उत्साह का वातावरण

रक्षाबंधन पर्व भी मनाया जा रहा है
सोनकच्छ। माहेश्वरी समाज में आज ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर रक्षा बंधन पर्व परंपरागत आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह 6 बजे शुभ मुहूर्त की शुरुआत के साथ ही कार्यक्रम प्रारंभ हुए और दिनभर समाजजन धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होकर पर्व की गरिमा बढ़ाएंगे। समाज में उत्साह और भाई-बहन के स्नेह का विशेष माहौल बना हुआ है।

परंपरा की अनूठी पहचान-
आमजन में रक्षा बंधन का पर्व श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है, किंतु माहेश्वरी समाज में इसे भाद्रपद पंचमी यानी ऋषि पंचमी पर मनाने की परंपरा है। समाज के वरिष्ठजन बताते हैं कि यह परंपरा केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य से भी जुड़ी है।
उत्पत्ति और महेश नवमी का संबंध-
माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान महेश और माता पार्वती के आशीर्वाद से हुई है। समाजजन महेश नवमी के रूप में इस दिव्य उत्पत्ति को स्मरण करते हैं। मान्यता है, कि ऋषि-मुनियों के श्राप से पत्थर बने 72 उमराव और राजकुमारों को भगवान महेश ने पुनः जीवन प्रदान किया और उन्हें वैश्य धर्म का पालन करने का आदेश दिया।
रक्षा सूत्र से राखी तक का सफर-
इसी दिन ऋषि पंचमी पर ऋषि-मुनियों ने रक्षा सूत्र बांधकर इनकी रक्षा का संकल्प लिया। कालांतर में यही परंपरा बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधने के रूप में परिवर्तित हो गई। तभी से माहेश्वरी समाज रक्षा बंधन को श्रावण पूर्णिमा पर नहीं, बल्कि ऋषि पंचमी पर धूमधाम से मनाता है।

समाज में उत्साह का माहौल-
सुबह से ही समाजजन परंपरागत वेशभूषा में एक-दूसरे को शुभकामना दे रहे हैं। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर दीर्घायु और सुख-समृद्धि की मंगलकामना कर रही हैं। भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह और सुरक्षा का वचन निभा रहे हैं।
दिनभर विभिन्न धार्मिक आयोजन, सामूहिक पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। बच्चों और युवाओं में भी पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।




