विश्व शतरंज दिवस पर जेएनआईबीएम में रणनीतिक सोच का पाठ, विद्यार्थियों ने खेले रोमांचक मुकाबले

उज्जैन। विश्व शतरंज दिवस के अवसर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान (जेएनआईबीएम) में शतरंज आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शतरंज के माध्यम से रणनीतिक सोच, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान मैत्रीपूर्ण शतरंज मुकाबले आयोजित किए गए, वहीं प्रतिभागियों ने शतरंज की विभिन्न पहेलियां हल कर अपनी बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि शतरंज की जड़ें भारत के प्राचीन खेल ‘चतुरंग’ से जुड़ी हैं। यह खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि तार्किक चिंतन, धैर्य, अनुशासन और दूरदर्शी निर्णय लेने की कला सिखाता है। उन्होंने इस तरह के आयोजन को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी बताते हुए संस्थान की सराहना की।
संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में शतरंज जैसे माइंड गेम्स विद्यार्थियों में विश्लेषण क्षमता, नेतृत्व कौशल और जटिल परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्व शतरंज दिवस का उद्देश्य केवल खेल को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि युवाओं में रणनीतिक एवं रचनात्मक सोच का विकास करना भी है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय शतरंज खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व चैंपियन डी. गुकेश, ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद और ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को नई पहचान दिलाई है। उनकी सफलता देश के युवाओं को शतरंज की ओर आकर्षित कर रही है और यह दर्शाती है कि भारतीय प्रतिभाएं वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। अंत में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक शतरंज मुकाबलों में भाग लिया और रणनीतिक पहेलियों को हल किया।
कार्यक्रम में डॉ. शेखर दिसावल, अमरनाथ सिंह, ओमप्रकाश यादव, इंजीनियर मेहा शर्मा, वेदांत रघुवंशी, चेतन पटेल तथा गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इंजीनियर चंदन कुमार झा सहित संस्थान के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




