शिक्षा

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे? फायर सेफ्टी के बिना चल रहे कई निजी स्कूल!

Share

 

सिरोल्या (अमर चौधरी)। लखनऊ के एक व्यावसायिक भवन में पिछले दिनों हुए भीषण अग्निकांड और देवास के एक निजी स्कूल में आगजनी की घटना ने बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि देवास में बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि स्कूलों में फायर सेफ्टी कितनी अहम है।

हैरानी की बात यह है, कि कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती बरती जा रही है, लेकिन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कई निजी स्कूलों की फायर सेफ्टी व्यवस्था अब भी सवालों के घेरे में है। देवास शहर से करीब 20 से 25 किलोमीटर के दायरे में संचालित कई निजी स्कूलों में प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ने पहुंचते हैं, लेकिन कुछ स्कूलों में न तो पर्याप्त अग्निशमन उपकरण हैं और न ही आपातकालीन निकासी (इमरजेंसी एग्जिट) की समुचित व्यवस्था।

संकरी गलियों में चल रहे स्कूल-
कुछ निजी स्कूल संकरी गलियों या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। फायर सेफ्टी को लेकर भी लापरवाही बरती जा रही है।

नियम तो हैं, लेकिन पालन कितना?
शिक्षा विभाग सुरक्षा संबंधी कई मापदंड तय करता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— परिसर में पर्याप्त संख्या में चालू हालत के अग्निशामक यंत्र। बड़े स्कूलों में ऑटोमैटिक फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर। मुख्य द्वार के अलावा अलग इमरजेंसी एग्जिट।
प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त चौड़े रास्ते। सवाल यह है कि क्या इन नियमों का नियमित निरीक्षण भी किया जाता है?

जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल-
जपं सदस्य प्रतिनिधि राकेश खिरनी का कहना है कि स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में फायर सेफ्टी की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। कई स्कूलों में जरूरी संसाधनों का अभाव है। शिक्षा विभाग को नियमित जांच कर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्रामीण मुकेश बंदावाले का कहना है कि फायर सेफ्टी बच्चों के लिए सुरक्षा कवच है। प्रत्येक स्कूल में इमरजेंसी एग्जिट होना चाहिए। आए दिन आगजनी की घटनाएं हो रही हैं, इसलिए विभाग को विशेष अभियान चलाकर सभी स्कूलों की जांच करनी चाहिए।

युवा नेता प्रतीक चौधरी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मान्यता के समय नियमों का पालन कराया जाता है, लेकिन बाद में नियमित निरीक्षण भी जरूरी है। स्कूल भवनों के साथ-साथ स्कूल वाहनों की सुरक्षा जांच भी नियमित रूप से होनी चाहिए।

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के संकेत
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी राजीव सूर्यवंशी ने कहा कि स्कूल मान्यता अधिनियम के तहत निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना प्रत्येक स्कूल संचालक के लिए अनिवार्य है। फायर सेफ्टी की व्यवस्था रखना बेहद जरूरी है। जिला स्तर की बैठक में संबंधित संकुल प्राचार्यों को सभी स्कूलों की जांच के निर्देश दिए जाएंगे।

Back to top button