धर्म-अध्यात्म

नेमावर में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या की तैयारियां तेज

भगवान परशुराम ने यहीं किया था पितृ तर्पण, पितरों के मोक्ष की कामना लेकर महाराष्ट्र-गुजरात सहित कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

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नेमावर (संतोष शर्मा)। नर्मदा और गोनी नदी के पावन संगम पर बसे नेमावर में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर्व स्नान को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

आगामी 10 अक्टूबर शनिवार को होने वाले दो दिवसीय पर्व स्नान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए खातेगांव एसडीएम राजेंद्र पंवार की अध्यक्षता में स्थानीय जाट समाज धर्मशाला परिसर में अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, घाटों की व्यवस्था, यातायात, पार्किंग और भीड़ नियंत्रण सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में एसडीओपी कन्नौद आदित्य तिवारी, अश्वनी राठौर, जनपद पंचायत खातेगांव के सीईओ, तहसीलदार खातेगांव, नगर परिषद अध्यक्ष कृष्ण गोपाल अग्रवाल, थाना प्रभारी टीना शुक्ला, सीएमओ आनंदीलाल वर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

गहरे पानी वाले स्थानों पर बेरिकेडिंग, घाटों पर रहेगी निगरानी-
बैठक में तय किया गया कि पर्व स्नान के दौरान नर्मदा के गहरे पानी वाले स्थानों पर बेरिकेडिंग कर वहां स्नान प्रतिबंधित किया जाएगा। घाटों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के साथ सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जाएगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए घाटों पर अग्निशामक व्यवस्था, नावों पर तैराक दल और पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती की जाएगी।

भीड़ वाले स्थानों पर पेयजल के टैंकर उपलब्ध कराने, मेले में आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था करने तथा अव्यवस्थित रूप से लगी दुकानों को व्यवस्थित करने के निर्देश भी दिए गए। घाटों पर सपेरा, भिक्षा मांगने वालों और पशुओं के प्रवेश पर रोक रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

भगवान सिद्धनाथ के दर्शन के लिए व्यवस्था-
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए भगवान सिद्धनाथ के दर्शन के लिए सभागृह से दर्शन की व्यवस्था किए जाने पर भी चर्चा हुई। भीड़ अधिक होने की स्थिति में गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रखा जाएगा, ताकि दर्शन व्यवस्था के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी बनी रहे।

भगवान परशुराम से जुड़ा है पितृ तर्पण का इतिहास-
नेमावर का सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर्व केवल स्नान और धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आस्था की जड़ें भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यता में भी दिखाई देती हैं। मान्यता के अनुसार, नेमावर से पूर्व दिशा में ग्राम तुरनाल के समीप नर्मदा-गोनी नदी के तट पर भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के मोक्ष की कामना से पितृ तर्पण किया था।

नर्मदा और गोनी नदी के संगम स्थल पर एक शिला पर आज भी पांच पिंडों के चिन्ह दिखाई देते हैं। वर्षा ऋतु में नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण यह स्थान पानी में डूबा रहता है और जलस्तर कम होने के बाद मार्च माह के आसपास इसके दर्शन होते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के चलते नेमावर को पितृ तर्पण और मोक्ष की कामना से जुड़े महत्वपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है।

गया नहीं पहुंच पाने वाले श्रद्धालु भी आते हैं नेमावर-
पितृ तर्पण की परंपरा और भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यता के कारण सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर नेमावर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु गया तीर्थ नहीं पहुंच पाते, वे नेमावर में पितृ तर्पण कर अपने पितरों के मोक्ष की कामना करते हैं।

इसी आस्था के चलते मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु नेमावर पहुंचते हैं। इस बार अमावस्या शनिवार को होने के कारण भी श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारी शुरू कर दी है।

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