देवास मंडी हो रही हाईटेक: पेमेंट गेटवे प्रणाली का हुआ सफल ट्रायल

जरूरत का पैसा नकद ले सकेंगे किसान, शेष राशि तत्काल खाते में पहुंचेगी
मंडी सचिव ने किसानों और व्यापारियों को समझाए डिजिटल भुगतान के फायदे
देवास। देवास कृषि उपज मंडी अब पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रही है। जल्द ही किसानों को मंडी में उपज बेचने के बाद भुगतान के लिए नकदी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किसानों के हित में कार्य किए जा रहे हैं। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह के मार्गदर्शन में देवास मंडी में नवाचार हो रहे हैं। नई पेमेंट गेटवे प्रणाली के माध्यम से मंडी में प्रवेश से लेकर उपज की बिक्री और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
किसान उपज बेचकर जरूरत की राशि नकद ले सकेंगे और शेष राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे और सुरक्षित तरीके से पहुंचेगी। देवास मंडी में कुछ व्यापारिक फर्मों ने इस व्यवस्था के तहत किसानों को ट्रायल के रूप में सफल डिजिटल भुगतान भी किया है।
किसानों को दी डिजिटल भुगतान की जानकारी-
पेमेंट गेटवे प्रणाली के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए बुधवार को मंडी सचिव अरविंद कुमार परिहार ने मंडी क्रमांक-2 का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उन्हें नई व्यवस्था के लाभ बताए। साथ ही विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर योजना के तहत उनका पंजीयन भी कराया, ताकि अधिक से अधिक व्यापारी इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़ सकें।
ऐसे होगी पूरी डिजिटल प्रक्रिया-
– नई व्यवस्था के तहत किसान के मंडी पहुंचने से लेकर भुगतान मिलने तक हर चरण डिजिटल होगा। सबसे पहले किसान को गेट पास जारी किया जाएगा। इसके बाद कृषि उपज की खुली बोली (ऑक्शन) होगी। बोली पूरी होने के बाद उपज की तुलाई और वजन किया जाएगा।
इसके आधार पर भुगतान पत्रक तैयार होगा, जिसमें उपज का मूल्य, मंडी शुल्क और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज रहेंगे। खरीदार नकद या ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करेगा, जिसे सुरक्षित पेमेंट गेटवे के जरिए बैंकिंग नेटवर्क में प्रोसेस किया जाएगा। मंडी शुल्क कटने के बाद शेष राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा हो जाएगी। पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर किसान और संबंधित पक्षों को डिजिटल ई-रसीद भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें किसान कुछ राशि नकद ले सकेगा।
नकदी की परेशानी और लूट का खतरा होगा कम-
देवास कृषि उपज मंडी प्रदेश की प्रमुख मंडियों में शामिल है। सीजन के दौरान यहां प्रतिदिन 50 से 60 हजार बोरी अनाज की आवक होती है। देवास ही नहीं, आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में किसान यहां अपनी उपज बेचने पहुंचते हैं।
प्रतिदिन करोड़ों रुपए का कारोबार होने के कारण व्यापारियों को बड़ी मात्रा में नकदी की आवश्यकता पड़ती है। कई बार बैंकों से पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं हो पाती, वहीं बड़ी रकम के लेन-देन में लूट और चोरी जैसी घटनाओं का भी खतरा बना रहता है। डिजिटल पेमेंट गेटवे लागू होने के बाद इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
किसानों और व्यापारियों दोनों को मिलेगा लाभ-
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबे इंतजार या नकदी लेकर घर जाने की चिंता नहीं रहेगी। वहीं व्यापारियों को भी बड़ी मात्रा में नकदी रखने और परिवहन करने की आवश्यकता कम होगी। पूरी भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी होने से विवादों में भी कमी आएगी तथा रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से डिजिटल माध्यम में उपलब्ध रहेगा।

मंडी सचिव ने क्या कहा-
मंडी सचिव अरविंद कुमार परिहार ने कहा कि पेमेंट गेटवे प्रणाली लागू होने से भुगतान प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तेज होगी।
किसानों को आवश्यकता की राशि नकद मिल सकेगी और शेष राशि बैंक खातों में सीधे पहुंचने से नकदी के लेन-देन की परेशानी कम होगी, वहीं व्यापारियों को भी बड़ी मात्रा में नकदी रखने और ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह व्यवस्था मंडी को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।




