धर्म-अध्यात्म

श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं जीवन को सही दिशा देती हैं: पूजा शर्मा

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हाटपीपल्या (नरेंद्र ठाकुर)। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं हमें सिखाती हैं कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। जीवन में अहंकार का स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि अहंकार का अंत निश्चित है। प्रकृति, गौसेवा और धर्म के प्रति श्रद्धा भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है। श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाएं मनुष्य को प्रेम, भक्ति, करुणा और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देती हैं। सत्संग; कलियुग में भागवत कथा प्रदान करती है मंगल- पूजा शर्मा

यह बात देवधाम पालीया बाबा गुराडिया हातू में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक पूजा शर्मा ने कही। कथा के दौरान कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर उनकी विभिन्न बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। भागवत कथा; भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला का प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

उन्होंने बताया कि भगवान ने जन्म लेते ही अपने दिव्य स्वरूप के दर्शन कराए, लेकिन माता की इच्छा पर बाल स्वरूप धारण कर सामान्य शिशु की तरह रोने लगे। भगवान के जन्म के बाद यमुना मैया द्वारा उनके दर्शन की अभिलाषा तथा चरण स्पर्श का प्रसंग भी श्रद्धालुओं को सुनाया गया।

पूतना वध प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि राजा कंस ने भगवान श्रीकृष्ण का वध कराने के लिए राक्षसी पूतना को गोकुल भेजा था। पूतना ने विषपान कराने का प्रयास किया, लेकिन भगवान ने उसका उद्धार किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान भाव के भूखे होते हैं और उनके शरणागत होने वाले का कल्याण निश्चित है।

गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की महिमा समझाई। जब देवराज इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि ईश्वर पर विश्वास रखने वाले भक्तों की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं तथा अहंकार का अंत अवश्य होता है।

कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे। कथा के समापन पर भागवत महापुराण की आरती उतारी गई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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