
उदयनगर (बाबू हनवाल)। बारिश की फुहारों ने पुंजापुरा के बरझाई घाट क्षेत्र की फिजा पूरी तरह बदल दी है। जहां कुछ सप्ताह पहले तक सूखी नजर आने वाली पहाड़ियां थीं, वहीं अब चारों ओर हरियाली की मखमली चादर बिछ गई है।
घने जंगल, कल-कल बहते झरने, घुमावदार घाट मार्ग और बादलों से घिरी पहाड़ियां प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। यही वजह है कि इंदौर, देवास सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में पर्यटक हर सप्ताह यहां पहुंच रहे हैं।
रविवार और छुट्टी के दिनों में तो पूरा इलाका पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार हो जाता है। परिवार, युवा और प्रकृति प्रेमी यहां पहुंचकर मानसून के खूबसूरत नजारों का आनंद ले रहे हैं।
मोहड़ाघाट… जहां हर मोड़ पर दिखती है प्रकृति की नई तस्वीर
पुंजापुरा का बरझाई घाट का सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल मोहड़ाघाट इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चरम पर है। घुमावदार सड़कें, ऊंची-ऊंची पहाड़ियां, बारिश के पानी से बने झरने और गहरी घाटियां यहां आने वालों को रोमांच का अलग ही अनुभव कराती हैं।
सड़क के दोनों ओर फैले सागौन सहित विभिन्न प्रजातियों के घने वृक्ष मानसून में और भी मनमोहक दिखाई दे रहे हैं। हल्का कोहरा, ठंडी हवाएं और पहाड़ियों से गिरता पानी ऐसा एहसास कराता है मानो किसी हिल स्टेशन की वादियों में पहुंच गए हों।
पिकनिक स्पॉट बना जंगल, परिवारों के साथ मना रहे छुट्टियां-
रविवार को बड़ी संख्या में परिवार यहां पिकनिक मनाने पहुंच रहे हैं। कई लोग जंगल के सुरक्षित स्थानों पर बैठकर घर से लाया हुआ भोजन करते हैं, वहीं कुछ लोग लकड़ी के चूल्हे पर चाय और खाना बनाकर प्रकृति के बीच छुट्टी का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
बच्चे हरियाली में खेलते हैं, युवा फोटो और वीडियो शूट करते हैं, जबकि बुजुर्ग शांत वातावरण में प्रकृति का आनंद लेते हैं। सोशल मीडिया पर भी यहां के फोटो और रील्स तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे अन्य लोग भी यहां आने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
बारिश में गर्मागर्म भुट्टे का स्वाद, बढ़ रही स्थानीय लोगों की आमदनी
मोहड़ाघाट मार्ग पर स्थानीय ग्रामीण गर्मागर्म भुट्टे बेचते नजर आते हैं। बारिश के मौसम में पहाड़ियों के बीच बैठकर ताजे भुट्टों का स्वाद पर्यटकों को अलग ही आनंद देता है।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या से आसपास के ग्रामीणों को भी रोजगार मिलने लगा है। भुट्टे, चाय, नाश्ता और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले लोगों की अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है।
आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम
मोहड़ाघाट की खूबसूरती के साथ-साथ यहां धार्मिक आस्था भी लोगों को आकर्षित करती है। निकट स्थित ओखलेश्वर मंदिर में अखंड रामायण पाठ का आयोजन चलता रहता है, जहां श्रद्धालु दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।
इसके अलावा समीप स्थित झाड़ उखाड़ हनुमानजी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित ये धार्मिक स्थल पर्यटन को आध्यात्मिक अनुभव से भी जोड़ते हैं।
महिगांव डेम भी बना आकर्षण का केंद्र
मोहड़ाघाट के अलावा महिगांव डेम भी इन दिनों पर्यटकों की पसंदीदा जगह बन गया है। बारिश के बाद लबालब भरता डेम, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण लोगों को घंटों यहां रुकने के लिए मजबूर कर देता है।
कई पर्यटक एक ही दिन में बरझाई घाट, मोहड़ाघाट, ओखलेश्वर मंदिर और महिगांव डेम का भ्रमण कर अपनी यात्रा को यादगार बना रहे हैं।
प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल रहा तो आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी। पुंजापुरा क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां मूलभूत सुविधाओं और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए तो यह क्षेत्र मालवा का प्रमुख मानसूनी पर्यटन केंद्र बन सकता है।
सावधानी भी है जरूरी
बारिश के मौसम में घाट मार्ग फिसलन भरे हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की सलाह है कि पर्यटक वाहन सावधानी से चलाएं, गहरी खाइयों और झरनों के पास न जाएं तथा जंगल में स्वच्छता बनाए रखते हुए प्लास्टिक कचरा न फैलाएं।
हरियाली, झरनों की मधुर आवाज, ठंडी हवाएं, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुकून… मानसून में पुंजापुरा का बरझाई घाट, मोहड़ाघाट और महिगांव डेम सचमुच ऐसी सौगात हैं, जिन्हें देखने के बाद हर पर्यटक दोबारा यहां लौटने की इच्छा जरूर करता है।




