धर्म-अध्यात्म

भागवत कथा में धूमधाम से हुआ कृष्ण रुक्मिणी विवाह

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प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु ले रहे कथा का लाभ

देवास। औदुंबर ब्राह्मण समाज वरिष्ठ नागरिक मंच के तत्वाधान में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण के षष्ठम दिवस पर कथा व्यास पं डॉ दीपेश पाठक (आष्टा) ने कहा कि भगवान कृष्ण ने जिस प्रकार गिरिराज गोवर्धन पर्वत को धारण कर प्रकृति की रक्षा की थी, उसी प्रकार हमें भी प्रकृति एवं पर्यावरण को संरक्षित करना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने आमोद प्रमोद के साथ कई राक्षसों का संहार किया और लोगों का कल्याण। भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल से मथुरा गमन और फिर द्वारका पहुंचने तक की सम्पूर्ण कथा सुनाई। कथा के दौरान भगवान कन्हैया की ब्रज लीलाओं का वर्णन किया।

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भगवान की मथुरा गमन की कथा में बताया कि कंस ने एक विशाल धनुष यज्ञ का आयोजन किया और छलपूर्वक श्रीकृष्ण व बलराम को मथुरा बुलाने के लिए अपने मंत्री अक्रूर को गोकुल भेजा। कृष्ण और बलराम ने निमंत्रण स्वीकार किया और गोकुल वासियों को भारी मन से विदा कर मथुरा के लिए प्रस्थान किया। मथुरा में मार्ग में उन्हें कुब्जा नाम की एक दासी मिली जो कंस के लिए चन्दन ले जाती थी। कृष्ण ने प्रसन्न होकर उसके कुबड़ेपन को ठीक कर उसे सुंदर बना दिया। कंस का धोबी मिला उसको दंड दिया। इसके पश्चात कृष्ण ने यज्ञशाला में रखे ‘शिव धनुष’ को अनायास ही तोड़ दिया। इसके बाद कंस के भेजे सभी मल्लों—जैसे चाणूर और मुष्टिक-का वध किया।

रुक्मणी विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया, जहाँ भगवान कृष्ण शत्रुओं को पराजित कर रुक्मणी से विवाह करते हैं। रुक्मणी की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। मंगलाष्टक का गान शनि मंदिर के आचार्य पं अजय-वीणा कानूनगो द्वारा किया गया। कृष्ण रुक्मणी के पाँव पखारे। तत्पश्चात सभी समाज के श्रद्धालुओं के द्वारा श्रीमद्भागवत ओर व्यासपीठ पुजा आरती की गई व प्रसाद का वितरण किया गया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए मंच के अध्यक्ष महेंद्र उपाध्याय व सचिव महेन्द्र दुबे, संयोजक जयंत शर्मा ने अन्य शहरों से कथा श्रवण करने आये भक्तों का स्वागत किया।

वैदिक आचार्य नगरपुरोहित पं. मनीष पाठक (आष्टा) के द्वारा बताया गया कि प्रतिदिन स्थापित देवताओं का वैदिक कार्य मुख्य यजमान सहित पं अंकित चौधरी, पं सुमित शर्मा, पं महेश जोशी द्वारा विप्रजनों ने संपन्न कराया। अभिषेक वैदिक पूजन आरती आदि कार्य संपन्न हो रहे हैं।
श्रीमद्भागवत कथा का कल समापन दिवस है, जो प्रातः 11 बजे से प्रारम्भ होगी। ततपश्चात 1.30 बजे से भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया हैं।

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