How to learn english रटने से नहीं, समझने से बनेगी अंग्रेजी आपकी असली ताकत

किसी भी भाषा को रटकर नहीं, बल्कि समझकर और उपयोग में लाकर सीख सकते हैं
आज के दौर में अंग्रेजी सीखना जरूरत बन चुका है, लेकिन सिर्फ शब्दों को रट लेने या टेंस-ग्रामर तक सीमित रहने से कोई भी व्यक्ति इस भाषा में निपुण नहीं बन सकता। जिस तरह हम हिंदी को महसूस करके, समझकर और रोजमर्रा में इस्तेमाल करके सीखते हैं, ठीक उसी तरह अंग्रेजी को भी एक भाषा के रूप में समझना जरूरी है। जब तक हम अंग्रेजी को “सब्जेक्ट” नहीं बल्कि “कम्युनिकेशन का माध्यम” नहीं मानेंगे, तब तक धारा प्रवाह बोलना संभव नहीं होगा।
देवास। हमारे देश में आज अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि उनके बच्चे भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। स्कूलों में बच्चों को अंग्रेजी टेंस, ग्रामर और ट्रांसलेशन के आधार पर सिखाई जाती है। इससे बच्चे पढ़ना और लिखना तो सीख जाते हैं, लेकिन जब बात आत्मविश्वास के साथ बोलने या अपने विचार व्यक्त करने की आती है, तो वे कहीं न कहीं पीछे रह जाते हैं।
असल में समस्या सीखने के तरीके में है। अंग्रेजी को एक विषय (Subject) की तरह पढ़ाया जाता है, जबकि यह एक भाषा (Language) है। भाषा को रटकर नहीं, बल्कि समझकर और उपयोग में लाकर सीखा जाता है।
जैसे हम हिंदी बोलने के लिए कभी शब्दों को रटते नहीं हैं, बल्कि बचपन से सुनते, समझते और बोलते हुए सीखते हैं। ठीक उसी तरह अंग्रेजी भी एक प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए सीखी जा सकती है।
रटने से क्यों नहीं आती अंग्रेजी?
शब्दों को रटने से उनका सही उपयोग समझ में नहीं आता। ग्रामर के नियम याद रहने के बावजूद बोलते समय हिचकिचाहट होती है। ट्रांसलेशन पर निर्भरता बढ़ जाती है। आत्मविश्वास की कमी बनी रहती है। इसलिए अंग्रेजी सीखने का सही तरीका है- सुनना, समझना, बोलना और अभ्यास करना।
अंग्रेजी सीखने का सही तरीका क्या है?
– भाषा को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ना
– सोच को अंग्रेजी में विकसित करना
– बिना डर के बोलने का अभ्यास करना
– गलतियों से सीखने की आदत डालना
– पब्लिक स्पीकिंग के जरिए आत्मविश्वास बढ़ाना
पब्लिक स्पीकिंग क्यों है जरूरी?
अंग्रेजी सीखने का असली उद्देश्य सिर्फ पढ़ना या लिखना नहीं, बल्कि अपने विचारों को प्रभावी तरीके से व्यक्त करना है। जब बच्चा लोगों के सामने आत्मविश्वास के साथ बोलना सीखता है, तभी वह वास्तविक रूप से भाषा पर पकड़ बना पाता है।
पब्लिक स्पीकिंग बच्चों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाती है। यह आत्मविश्वास बढ़ाती है। लीडरशिप क्वालिटी विकसित करती है और कम्युनिकेशन स्किल मजबूत करती है।
ELC देवास की नई पहल-
इसी सोच को ध्यान में रखते हुए ELC (English Learning Center) देवास ने बच्चों के लिए एक विशेष कोर्स तैयार किया है। यह कोर्स पारंपरिक तरीके से हटकर बच्चों को अंग्रेजी को समझने, बोलने और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने की ट्रेनिंग देता है।
इस कोर्स की खास बात-
– इसमें बच्चों को रटने की बजाय समझने पर जोर दिया जाता है।
– वास्तविक जीवन के उदाहरणों के साथ सिखाया जाता है।
– पब्लिक स्पीकिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
– कम फीस में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है।
अभिभावकों के लिए संदेश-
यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सिर्फ अंग्रेजी पास न करे, बल्कि उसमें निपुण बने, आत्मविश्वास के साथ बोले और जीवन में आगे बढ़े—तो जरूरी है कि उसे सही दिशा और सही प्रशिक्षण मिले। बच्चों को ऐसा वातावरण दें, जहां वे बिना डर के सीख सकें, बोल सकें और खुद को बेहतर बना सकें। अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि सफलता के कई दरवाजे खोलने की कुंजी है।
संपर्क: ELC – बेहतर इंग्लिश, बेहतर व्यक्तित्व
“कला भारती” 121, सिविल लाइंस, देवास (म.प्र.)





