खेड़ापति हनुमान मंदिर में 15 दिवसीय अखंड रामायण पाठ प्रारंभ

हनुमानजी के जन्मोत्सव पर यज्ञ एवं भंडारे के साथ होगी पूर्णाहुति
बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। संत श्री 1008 ब्रह्मलीन केशव दासजी महाराज की प्रेरणा से सभी ग्रामवासियों के सहयोग से प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी नवनिर्मित खेड़ापति हनुमान मंदिर में रुद्राभिषेक कर रामायण पाठ प्रारंभ किया। यह पूर्णिमा हनुमानजी के जन्मोत्सव 2 अप्रैल तक किया जाएगा।
प्रतिदिन पूजन-पाठ पं. हरीश उपाध्याय द्वारा कराया जाएगा। समस्त ग्रामवासी भक्तिभाव से भगवान का पूजन एवं रामायण का पूजन कर अपने जीवन को धन्य करेंगे। पं. सुरेशचंद उपाध्याय, करण दुबे, मोहित गौतम, आनंद शर्मा, अमित शर्मा ने अभिषेक पूर्ण कराया। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रहलाद गिर गोस्वामी, पूरणसिंह दांगी, भोजराज पाटीदार, राजेंद्र पाटीदार, हरीश उपाध्याय, बलराम दांगी, हुकुम सिंह बरेडिया, केदार पाटीदार, माखनसिंह दांगी, जुगल किशोर अमड़ावदिया, पूर्व सरपंच रामचंद्र दांगी, कंचन दांगी, माखन पाटीदार , रतनलाल बरेडिया, बख्शी राम पटेल, गंगाराम बागवान आदि ने अभिषेक का लाभ लिया।
खेड़ापति हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार भी चल रहा है। इस दौरान लगभग 21 बार अखंड रामायण पूर्ण हो जाएगी। बारी-बारी से श्रद्धालु यहां आकर रामायण का पाठ करेंगे। साथ ही अखंड दीप प्रज्वलित किया गया है।
पं. उपाध्याय ने बताया, कि कलियुग के पापों का नाश करने वाली और मन के मल को दूर करने वाली रामचरित मानस जन्म-मरण रूपी रोग के नाश के लिए संजीवनी जड़ी है। विद्वान पुरुष नित्य प्रति इसको गाते हैं। इसमें सात सुंदर सीढ़ियां है, जो श्री रघुनाथजी की भक्ति को प्राप्त करने के मार्ग है। जिस पर श्री हरि की अत्यंत कृपा होती है, वही इस मार्ग पर पैर रखता है। याज्ञवल्क्यजी कहते हैं जो श्रीराम चरित मानस को पढ़ता है, उसमें प्रेम उत्पन्न हो जाता है। जगत में जितने भी राम उपासक हैं, उन्हें रामचरित मानस के समान कुछ भी प्रिय नहीं है। तुलसीदासजी कहते हैं इस कलिकाल में योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत और पूजन आदि कोई दूसरा साधन नहीं है बस श्रीराम का स्मरण करना।
श्रीराम का ही गुणगान गाना और निरंतर श्रीराम के ही गुण समूह को सुनना-पढ़ना चाहिए। जो मनुष्य रघुवंश के भूषण श्रीराम का यह चरित्र कहते हैं, सुनते हैं और गाते हैं वह कलियुग के पाप धोकर बिना परिश्रम के रामजी के परम धाम को चले जाते हैं। रामचरित मानस की पूर्णाहुति दो दिवसीय यज्ञ व भंडारे के साथ 23 अप्रैल को होगी।




