धर्म-अध्यात्म

फाल्गुनी अमावस्या पर नेमावर में उमड़ा आस्था का सागर

Share

– नर्मदा स्नान कर लिया पुण्य लाभ, पांच दिवसीय लघु पंचकोशी पदयात्रा का भक्तिभाव से समापन

नेमावर (संतोष शर्मा)। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की बड़ी अमावस्या पर तीर्थनगरी नेमावर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। नेमावर स्थित मां नर्मदा के घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। अलसुबह से ही घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और पूरा वातावरण “नर्मदे हर” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

नर्मदा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का आगमन सोमवार दोपहर से ही प्रारंभ हो गया था। संध्या समय भक्तों ने मां नर्मदा को दीप अर्पित कर दीपदान किया। दीपों की जगमगाहट से घाटों का दृश्य अलौकिक हो उठा। इसके बाद भजन-कीर्तन का दौर देर रात तक चलता रहा। कई श्रद्धालुओं ने घाटों पर ही रात्रि विश्राम किया।

अमावस्या स्नान के साथ मंदिरों में जलाभिषेक-
मंगलवार अल सुबह अमावस्या का पुण्यकाल प्रारंभ होते ही श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान उपरांत भक्तों ने प्राचीन सिद्धनाथ मंदिर, ऋणमुक्तेश्वर एवं पिंगलेश्वर महादेव में जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। श्रद्धालुओं ने गरीबों को दान-दक्षिणा भेंट कर पुण्य अर्जित किया।

पांच दिवसीय लघु पंचकोशी पदयात्रा का समापन-
विजया एकादशी से आरंभ हुई नर्मदा नाभि कुंड, सिद्धनाथ एवं रिद्धनाथ की पांच दिवसीय लघु पंचकोशी पदयात्रा का भी अमावस्या पर्व पर विधिवत समापन हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने पदयात्रा में शामिल होकर नर्मदा परिक्रमा का पुण्य लाभ लिया।

यात्रा के समापन अवसर पर भक्तों ने मां नर्मदा को चुनरी अर्पित की तथा हलुआ-कड़ाई की प्रसादी का भोग लगाया। नन्हीं कन्याओं का पाद पूजन कर यात्रा का समापन धार्मिक परंपरा के अनुरूप हुआ।
इस वर्ष यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अनुमानतः करीब 30 हजार श्रद्धालु इस भावपूर्ण लघु पंचकोशी यात्रा में सम्मिलित हुए, जो गत वर्ष की तुलना में अधिक है।

फाल्गुनी अमावस्या पर नेमावर में उमड़ी श्रद्धा ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि मां नर्मदा के प्रति भक्तों की आस्था अटूट और अखंड है।

Back to top button