मां नर्मदा की परिक्रमा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं- ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी

मां नर्मदा परिक्रमा यात्रियों का मां चामुंडा सेवा समिति ने किया स्वागत
देवास। मां चामुंडा सेवा समिति के अध्यक्ष समाजसेवी उम्मेदसिंह देवकुंर राठौड़ सपत्नीक, मोहन सिंह लोवंशी, अन्नुबाई लोवंशी, ओमवती लोवंशी लगभग 110 यात्रियों के साथ 5 से 19 दिसंबर तक 15 दिवसीय नर्मदा परिक्रमा यात्रा पर गए थे।
15 दिवसीय नर्मदा परिक्रमा यात्रा भागवत भूषण नारायण शास्त्री कांटाफोड़ वाले के सानिध्य में ओंकारेश्वर से शुरू हुई। वापस ओंकारेश्वर में ही समापन हुआ। परिक्रमा यात्रा से लौटने पर मां चामुंडा सेवा समिति की ओर से संत पूर्णानंद महाराज, ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी के सानिध्य में एवं समिति संयोजक रामेश्वर जलोदिया के नेतृत्व में शाल, श्रीफल, पगड़ी, पुष्पमालाओं से समाजसेवी उम्मेदसिंह देवकुंवर राठौड़ के साथ अन्य यात्रियों का आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि बैंक नोट प्रेस के उप महाप्रबंधक अभिराजसिंह मीनल ठाकुर थे।
ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शास्त्रों के अनुसार नर्मदा परिक्रमा का बड़ा ही महत्व है। मां नर्मदा की परिक्रमा के एक-एक पदचरण से हमारे जन्म-जन्मांतर के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। जब हम मां की परिक्रमा करते हैं, स्मरण करते हुए एक-एक कदम आगे बढ़ाते हैं तो जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। जीवन में आध्यात्मिक चेतना के साथ ही मन निर्मल हो जाता है। आत्मा चैतन्य हो जाती है। जब हम मां की परिक्रमा करते हैं तो स्वतः ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी, समाजसेवी नरेंद्र मिश्रा, प्रताप सिंह मेहता, नारायण व्यास, पंडित देवीशंकर तिवारी, दिनेश सांवलिया, इंदरसिंह गौड़, शशिकांत गुप्ता, प्रदीप लाठी, अवधेश तिवारी, अभिषेक अवस्थी, सुशील शिंदे, कैलाश परमार, मातृशक्ति प्रेमलता चौहान, मंजू जलोदिया, दुर्गा व्यास, सुधा सोलंकी, कला तंवर आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन रामेश्वर जलोदिया ने किया आभार सुरेंद्र सिंह राठौर ने माना।




