क्या आपका श्वान इन नस्लों में से तो नहीं है?

प्रतिबंधित श्वान नस्लों का रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा नगर निगम
देवास। नगर निगम ने शहर में पालतू श्वानों की सुरक्षा, नियंत्रण और जनहित को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।
आयुक्त दलीप कुमार ने सभी पालतू श्वान मालिकों से अपील की है कि वे अपने श्वानों का नियमित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और अनिवार्य रूप से लाइसेंस शाखा में रजिस्ट्रेशन कराएं। निगम ने स्पष्ट किया है कि बिना लाइसेंस पालतू श्वान रखना नियमों का उल्लंघन है, जिसके लिए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन द्वारा प्रतिबंधित घोषित श्वान नस्लों का रजिस्ट्रेशन नगर निगम द्वारा नहीं किया जाएगा। ऐसे श्वानों को पालना नियमों के विपरीत है और इनके पालनकर्ताओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शहर में रजिस्ट्रेशन और वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया स्वास्थ्य निरीक्षक हरेंद्र सिंह ठाकुर के माध्यम से नगर निगम की लाइसेंस शाखा में उपलब्ध है। निगम ने उन श्वान मालिकों को भी चेताया है जिन्होंने पहले रजिस्ट्रेशन करा रखा है कि वे नियमों का पालन सुनिश्चित करें और अपने पालतू श्वानों को सार्वजनिक स्थानों या उद्यानों में बिना मुखबंदिनी के न घुमाएं।
भारत में किन श्वान नस्लों पर है प्रतिबंध?
स्वास्थ्य निरीक्षक हरेंद्रसिंह ठाकुर के अनुसार, देश में कुछ श्वान नस्लों को उनकी आक्रामक प्रवृत्ति और सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम के कारण प्रतिबंधित किया गया है। इन नस्लों का पालन, प्रजनन और रजिस्ट्रेशन पूर्णतः प्रतिबंधित है।
पिट बुल टेरियर, टोसा इनु, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, फिला ब्रासीलीरो, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग, बोअरबोएल, बैंडोग, कांगल, मध्य एशियाई शेफर्ड डॉग, कोकेशियन शेफर्ड डॉग, रोडेशियन रिजबैक, वुल्फ डॉग, कैनारियो, अकबाश डॉग, मॉस्को गार्ड डॉग, केन कोर्सो।
इन नस्लों को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए संभावित खतरा माना जाता है। कई मामलों में इन नस्लों के हमलावर व्यवहार और अनियंत्रित प्रकृति को देखते हुए सरकार ने इन पर प्रतिबंध लगाया है।
निगम की अपील-
नगर निगम ने शहरवासियों से आग्रह किया है कि वे नियमों का पालन करने में प्रशासन का सहयोग करें ताकि शहर में पालतू श्वानों की वजह से होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।




